आउटसोर्सिंग एजेंसियों की मनमानी के खिलाफ मोर्चा सक्रिय, मुख्य सचिव को सौंपा ज्ञापन
कार्मिकों को पे-स्लिप नहीं, EPF कटौती पर भी सवाल; भविष्य को लेकर बढ़ी चिंता
देहरादून से सम्पादक देवेन्द्र सिंह राय
प्राइवेट आउटसोर्सिंग एजेंसियों की कथित मनमानी और कार्मिकों के शोषण के खिलाफ जन संघर्ष मोर्चा ने शासन स्तर पर आवाज बुलंद की है। मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने मुख्य सचिव आनंद बर्धन से मुलाकात कर इस संबंध में ज्ञापन सौंपा।

नेगी ने बताया कि प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों और निगमों में आउटसोर्सिंग एजेंसियों के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों का व्यापक शोषण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन कर्मचारियों को नियमित रूप से पे-स्लिप तक उपलब्ध नहीं कराई जाती, जिससे उन्हें अपने वेतन और अन्य कटौतियों की जानकारी तक नहीं मिल पाती।
उन्होंने आरोप लगाया कि एजेंसियों द्वारा कर्मचारियों के वेतन से ईपीएफ और कमीशन के नाम पर कटौती की जा रही है, लेकिन अधिकांश कर्मचारियों को यह तक नहीं पता कि उनका ईपीएफ वास्तव में जमा हो रहा है या नहीं, और उनका ईपीएफ नंबर क्या है।

नेगी के अनुसार, विभागों में कार्यरत प्रवक्ताओं, बीआरपी-सीआरपी सहित अन्य कार्मिकों का भविष्य इन अनियमितताओं के चलते अधर में लटक गया है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार द्वारा निर्धारित वेतनमान के बावजूद एजेंसियां भारी कटौती कर रही हैं, जबकि संबंधित विभाग इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।
जन संघर्ष मोर्चा ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस मामले में कार्रवाई नहीं की गई तो इसे सरकार के उच्च स्तर पर और मजबूती से उठाया जाएगा।






