National media news ( nm news)

सम्पादक देवेन्द्र राय

March 23, 2026 5:13 am

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5200 वर्ष बाद उसी अविनाशी योग की व्याख्या यथार्थ गीता में है — रामरक्षानंद जी महाराज 

मिर्जापुर ब्यूरो बांकेलाल निषाद “प्रणव”

 

5200 वर्ष बाद उसी अविनाशी योग की व्याख्या यथार्थ गीता में है — रामरक्षानंद जी महाराज 

 

हम सबका आदि धर्मशास्त्र गीता है । मनुष्य बाद में जन्मा , गीता पहले प्रसारित हुई । भगवान श्री कृष्ण ने गीता में कहा , अर्जुन ! इस अविनाशी योग को कल्प के आदि में अर्थात सृष्टि के आरंभ में मैंने सूर्य से कहा । सूर्य ने अपने पुत्र आदि मनु से कहा । मनु महाराज ने इस अविनाशी योग को अपनी स्मृति में धारण कर लिया और स्मृति की परंपरा दी । उन्होंने यही योग अपने पुत्र महाराज इक्ष्वाकु से कहा , इक्ष्वाकु से राजषियों ने जाना । इस महत्वपूर्ण काल से यह अविनाशी योग इस पृथ्वी पर से लुप्त हो गया था , मनुष्यों की स्मृति- पटल से ओझल हो गया था , लोग भूल गए थे – वही पुरातन योग , अविनाशी योग मै तेरे प्रति कहने जा रहा हूं ; क्योंकि तू प्रिय भक्त है , अनन्य शखा है । अर्जुन ने कुछ तर्क- वितर्क पश्चात स्वीकार किया कि मोह से उत्पन्न मेरा ज्ञान नष्ट हुआ

गोविंद । जो मनु महाराज ने स्मृति में धारण किया था , जिस स्मृति की परंपरा थी , मैं उस स्मृति को प्राप्त हुआ हूं । यह अविनाशी योग मैं स्मृति में धारण कर लिया । मैं आपकी आदेशों का पालन करूंगा । अर्जुन युद्ध के लिए प्रस्तुत हो गया । युद्ध हुआ , विजय हुई , एक धर्म साम्राज्य की स्थापना हो गई । एक संपूर्ण धर्मात्मा नरेश युधिष्ठिर अभिषेक हुए और एक ही धर्मशास्त्र गीता पुनः प्रसारण में आ गई । सरल,स्पष्ट तथा सत्य व्याख्या में पढ़िए ” यथार्थ गीता “इसी में आपका कल्याण निहित है।

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Author: NM News live

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