अम्बेडकर नगर ब्यूरो बांकेलाल निषाद “प्रणव”
सुख- शांति व समृद्धि हेतु यथार्थ गीता व भंडारे का आयोजन
विश्व गुरु विश्व गौरव से सम्मानित समय के तत्व द्रष्टा महापुरुष अनंत विभूषित करूणा निधान दया के अथाह सागर परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज के मुखारबिंद से नि:सृत संसार के कल्याणार्थ ईश्वरीय वाणी कालजयी धर्म – शास्त्र यथार्थ गीता का पाठ व भंडारे का आयोजन आज भियांव ब्राम्हणपट्टी ग्राम सभा के बाबा गोविंद साहब इंटर कालेज के सेवानिवृत्त शिक्षक हरिद्वार यादव के घर संपन्न हुआ। इस शुभ अवसर पर उनके पुत्र अध्यापक संजय यादव, पत्नी गुलाबवती , पुत्री किरन अध्यापिका आर्य कन्या इंटर कालेज अयोध्या, स़गीता, पुत्री अध्यापिका श्वेता विज्ञान वर्ग, सीमा संस्कृत शिक्षक रायबरेली, यशार्थ, यथार्थ, अविका, मन्नत, दिव्यम, शाक्या, आदि परिवार के लोग उपस्थित रहे। यथार्थ गीता संपन्न होने में लगभग कुल 19 घंटे लगा। इस अवसर पर उक्त परिवारों द्वारा भंडारे का आयोजन भी किया गया। सभी परिवार के सदस्यगण यथार्थ गीता का पाठ भी किये। यथार्थ गीता पूर्णतः ब्रह्म विद्या है। यह सृष्टि क आदि शास्त्र है। बड़े ही सौभाग्य की बात है कि यह हमारा आपका और पवित्र धर्म शास्त्र है। यथार्थ गीता संसार को मोक्ष प्रदान करने का खुला आमंत्रण देती है । यह किसी विशेष जाति धर्म मजहब का धर्म – शास्त्र नहीं है बल्कि सृष्टि के बृहद संसार का धर्म- शास्त्र है। यह मुक्ति प्रदान करने में कोई भेद – भाव नहीं रखती और संसार को भी चाहिए इसके बताये मार्ग पर कोई हिचक न करे। क्यों कि पूज्य श्री गुरुदेव भगवान संसार के हर प्राणी के लिए मातृवत स्नेह रखते हैं। उनकी गीतोक्त साधना संसार के हर मानव के लिए है जो भी उनके बताए मार्ग पर चलेगा उसे वे ढूंढ लेंगे और वहीं से उसके हृदय से रथी होकर उसका योगक्षेम करने लगेंगे। योगक्षेम करते हुए पूर्ति पर्यंत उसके साथ सखा की तरह खड़े रहेंगे और उसके हर समस्या का समाधान करेंगे। इसलिए संसार को ये भ्रम न रहे कि यथार्थ गीता केवल भारतीयों के लिए है यह पूरे संसार के लिए है। चूंकि यह ईश्वरीय वाणी है, ईश्वरीय वरदान है, ईश्वरीय धरोहर और थाती है, ईश्वरीय आदेश से लिखा गया है । पूज्य श्री गुरुदेव भगवान के जन्म जन्मांतर के तपस्या के बाद आज यह हमारे सामने ईश्वरीय प्राकट्य है । पूज्य श्री गुरुदेव भगवान बताते हैं कि जब मैंने इसे लिपिबद्ध कर पूर्ण किया तो आकाशवाणी हुई कि इसे लिखने में तुम्हारी इक्कीस वर्ष के तपस्या का फल लगा है। इतनी घोर तप के परिणाम में निसृत यथार्थ गीता हमारे लिए अनुकरणीय है वंदनीय है पूजनीय है और मोक्षदायिनी है इसको और इसके प्रणेता पूज्य श्री गुरुदेव भगवान को कोटि-कोटि नमन।







