संघ के शताब्दी वर्ष पर नागथात में स्वयंसेवकों का एकत्रीकरण
5 अक्टूबर। नागथात । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के निमित्त आज जौनसार बावर के नागथात में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का एकत्रीकरण संपन्न हुआ। संघ के 100 साल पूरे होने पर यह पहला अवसर था जब नागथात में गणवेशधारी इतनी बड़ी संख्या में स्वयंसेवक एकत्रित हुए।
खत लखवाड़, फरटाड, बहलाड, कोरु के स्वयंसेवकों का आयोजित एकत्रीकरण में वक्त के रूप में उपस्थित हुए जिला बौद्धिक प्रमुख मनीष नेगी ने संघ के प्रारंभ होने की प्रासंगिकता और संघ द्वारा देश के हित में किए गए कार्यों को विस्तार से रखा।
उन्होंने कहा है कि 1925 में विजयदशमी के दिन नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना डॉ केशव राव बलिराम हेडगेवार ने की जिसका उद्देश्य था कि यह भारत वर्ष सैकड़ो वर्षों की गुलामी के बाद एक सशक्त राष्ट्र के रूप में खड़ा हो इसलिए इस देश के नागरिकों को आत्मविश्वास के साथ खड़े होने की आवश्यकता है।
मुख्य शिक्षक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले भारत चौहान ने कहा कि आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ देश ही नहीं बल्कि विदेशों में चरित्र निर्माण का कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा है कि संघ ने विभिन्न क्षेत्रों में कार्य प्रारंभ किया – चाहे वह मजदूर संघ हो, विद्यार्थी परिषद हो, शिक्षा के क्षेत्र में विद्या भारती हो, खेल के क्षेत्र में क्रीड़ा भारती हो या वकीलों के क्षेत्र में अधिवक्ता परिषद हो इन तमाम संगठन का उद्देश्य राष्ट्र को प्रथम रखना है।
उन्होंने कहा है कि देश को परम वैभव पर पहुंचने के लिए देश के प्रत्येक व्यक्ति को निस्वार्थ भाव से देश की भावना के साथ जुड़ने की आवश्यकता है। आज हिंदुत्व की देश भर में सब लोग कर रहे हैं हिन्दुत्व भारत को विश्व गुरु बनने की ताकत रखता है। उन्होंने स्वयं सेवकों का आह्वान करते हुए कहा है कि अधिक से अधिक लोग संघ से जुड़े और अपने व्यक्तिगत जीवन को राष्ट्र के प्रति समर्पित करते हुए इस देश को आगे बढ़ाने में अपना योगदान दें।
इस मौके पर कार्यक्रम की अध्यक्षता लोक निर्माण विभाग के सेवानिवृत अधीक्षक अभियंता शूरवीर सिंह तोमर ने की। कार्यक्रम में रणबीर सिंह तोमर, धन सिंह तोमर, दिनेश तोमर, मनोज तोमर, पूरन सिंह, विकास तोमर, राहुल चौहान, प्रदीप वर्मा, राजवीर राठौर, संजय तोमर, अशोक कुमार, केशर सिंह मुकेश तोमर, मदन सिंह, रविन्द्र सिंह, सीताराम चौहान, मोहर सिंह चौहान, बारु सिंह चौहान, नरेंद्र सिंह चौहान, आदि लोग उपस्थित रहे। जबकि मुख्य शिक्षक के रूप भारत चौहान ने अपनी भूमिका निभाई है।






