National media news ( nm news)

सम्पादक देवेन्द्र राय

March 23, 2026 5:12 am

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श्री परमहंस आश्रम मुबारकपुर चंदौली में श्री प्रेम जी द्वारा भव्य स्वागत 

चन्दौली ब्यूरो बांकेलाल निषाद “प्रणव”

नेपाल से पधारे संत के साथ शक्तिषगढ़ संतों का आगमन

श्री परमहंस आश्रम मुबारकपुर चंदौली में श्री प्रेम जी द्वारा भव्य स्वागत

विश्व गुरु विश्व गौरव से सम्मानित कालजयी धर्म शास्त्र यथार्थ गीता के प्रणेता समय के तत्व द्रष्टा महापुरुष अनंत विभूषित करूणा निधान परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज के कृपापात्र शिष्य श्री तुलसी महाराज जिन्हें गीतोक्त साधना के प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी नेपाल में मिली है और उनके साथ में श्री परमहंस आश्रम शक्तेषगढ़ के सत्यानवेषी संत श्री लाले महाराज, श्री राजेन्द्र महाराज जी, श्री अखिलेश महाराज जी, जगनेटर रुम से कृष्णा यादव और जनपद आजमगढ़ से भक्त राजा सिंह का आगमन श्री परमहंस आश्रम मुबारकपुर में कर्मनाशा नदी के तट पर पदार्पण हुआ , वहां के पूज्य श्री गुरुदेव भगवान के कृपापात्र शिष्य श्री प्रेम जी महाराज ने पधारें सभी संतों का भव्य- नव्य स्वागत किया। वहां उपस्थित सैकड़ों भक्तों को श्री तुलसी जी महाराज ने बताया कि संत की सेवा ही एक न एक दिन भक्ति के मार्ग पर ले चलती है । संत की सेवा कभी बाया नहीं जाती। महावीर स्वामी के भक्ति पथ का पहला सफर संत दर्शन से ही हुआ था आगे चलकर यही संत दर्शन उन्हें 24 वें जन्म में पूर्णत्व की प्राप्ति करा कर ‘अरिहंत’ बना दिया । तदुपरांत श्री लाले महाराज जी ने बताया कि एक नाम जिस पर दादा गुरु भी बल देते थे दो- ढाई अक्षर वाला नाम, श्वास में ढलने वाला नाम ओम, राम अथवा शिव जपना चाहिए और एक परमात्मा सद्गुरु का ध्यान करना चाहिए । महापुरुषों का कहना है कि– *कोटि नाम संसार में ताते भक्ति न होय।*

*आदि नाम और गुप्त जप विरला जाने सोय।।* उन्होंने बताया कि नाम जप कब करना चाहिए? अहर्निश उठते -बैठते सोते -जागते हमेशा नाम याद आया करे । इसी जप से पुण्य पुरुषार्थ बढ़ेगा और वही पुण्य पुरुषार्थ एक न एक दिन परमात्मा से मेल करा देगा। श्री प्रेम महाराज जी ने बताया कि संघर्ष ही हमें मंजिल तक की दूरी तय कराता है जिसे हमने भी किया है बाधाएं आयी और और सद्गुरु भगवान की कृपा से चली भी गयी । इसलिए सबको पूज्य श्री गुरुदेव भगवान पर विश्वास करते हुए लक्ष्य एक परमात्मा की राह में चल पड़ना चाहिए। *गुरुर वाक्यं सतत ज्ञेयं न ज्ञेयं शास्त्र कोटिभि:।* करोड़ों शास्त्र भी फेल है गुरु भगवान के शब्दशः आदेश पर चलने में। श्री राजेन्द्र महाराज जी ने संतों के प्रवचन के पूर्व *विनय मेरी सुन लो जगत के विधाता* नामक भजन अश्रुपूरित हृदय से सुनाकर लोगों के हृदय को भगवान के प्रति प्रेममय अश्रुओं से भिगो दिया। तदुपरांत श्री अखिलेश महाराज जी ने “श्वाशों का क्या भरोसा रुक जए चलते चलते” भजन गाकर भगवान के प्रति प्रेरित किया। इस शुभ अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। यथार्थ गीता का मुफ्त में वितरण किया गया।

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Author: NM News live

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