वरिष्ठ पत्रकार एवं चिंतक बांकेलाल निषाद “प्रणव” की रिपोर्ट

भगवान बातें करते हैं उठाते बैठाते सोवाते जगाते एवं पग पग पर संभालते हैं – स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज
यथार्थ गीता के आलोक से पूरे विश्व को आलोकित करने वाले 21 वी सदी के युग प्रवर्तक, करुणा के सागर, पतित पावन, अज्ञान से आच्छादित संसार को ज्ञान के प्रकाश से प्रकाशित करने वाले दया के अथाह सागर, विश्व गुरु विश्व गौरव से सम्मानित कालजयी धर्म-शास्त्र यथार्थ गीता के प्रणेता समय के तत्व द्रष्टा महापुरुष अनंत विभूषित करुणा निधान परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज ने मोक्षदायिनी ज्ञान गंगा केंद्र श्री परमहंस आश्रम शक्तेषगढ़ में आज हजारों की संख्या में उपस्थित संत महात्माओं भक्तों के बीच भगवान के संबंध में एक विचित्र सी बात कही ऐसी विचित्र बात जो कभी काया के बीर कबीर ने कहा था। देखि देखि जिय अचरज होई यह पद बूझे बिरला कोई धरती उलटि अकासहि जाई चीटी के मुख हस्ति समाई । बिना पवन सो पर्वत उडे जीव जन्तु सब बृक्षा चढ़े।सूखे सरवर उठे हिलोरा बिनु जल चकवा करत किलोरा बैठा पंडित पढे कुरान बिनु देखे का करत बखान । कहहि कबीर यह पद को जान सोइ सन्त सदा परवान।। पूज्य श्री गुरुदेव भगवान ने कहा कि
भगवान बातें करते हैं उठाते बैठाते हैं जगाते हैं खिलाते- पिलाते हैं संभालते हैं, संकटों का पहाड़ आये तो उसे धूल के कंण में तब्दील कर देते हैं। पूज्य श्री गुरुदेव भगवान ने अपने गुरुदेव भगवान की स्तुति करने के बाद बताया कि भगवान दूर नहीं रहते पथरा पहाड़ में नहीं रहते सर्वत्र रहते हैं आपके हृदय में रहते हैं भगवान उतना नजदीक है कि जितना हाथ पांव। कुछ भक्तों ने पूज्य श्री गुरुदेव भगवान को भजन सुनाकर उन्हें रिझाया। आइये सुनते हैं पूज्य श्री गुरुदेव भगवान के श्रीमुख से निसृत संसार के लिए यह ईश्वरीय संदेश ।






