मिर्जापुर से बांकेलाल निषाद “प्रणव” की रिपोर्ट
–
भगवान एक से सवा कभी हुए ही नहीं और न ही भविष्य में होंगे पर बोलते हुए
धरम न दूसर सत्य समाना। आगम निगम पुरान बखाना।।
यथार्थ गीता के आलोक से पूरे विश्व को आलोकित करने वाले 21 वी सदी के युग प्रवर्तक, करुणा के सागर, पतित पावन, अज्ञान से आच्छादित संसार को ज्ञान के प्रकाश से प्रकाशित करने वाले दया के अथाह सागर, विश्व गुरु विश्व गौरव से सम्मानित कालजयी धर्म-शास्त्र यथार्थ गीता के प्रणेता समय के तत्व द्रष्टा महापुरुष अनंत विभूषित करुणा निधान परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज ने मोक्षदायिनी ज्ञान गंगा केंद्र श्री परमहंस आश्रम शक्तेषगढ़ में उपस्थित हजारों भक्तों संत महात्माओं के बीच अपने गुरुदेव भगवान की स्तुति वंदन की फिर उन्होंने बताया कि भगवान एक से सवा कभी हुए ही नहीं, और भविष्य में भी कभी नहीं होंगे। भ्रमवश संसार हमारा भगवान वो तुम्हारा भगवान वो के चक्कर में पड़ा रहता हैं। पूज्य श्री गुरुदेव भगवान के एक भक्त ने अंखियां हरि दर्शन की प्यासी के नाम का बहुत ही सुन्दर भजन सुनाया। आइये श्रवण करें पूज्य श्री गुरुदेव भगवान के श्रीमुख से निसृत संसार के कल्याण में निकली यह अमृत वाणी का सारांश।






