वाराणसी ब्यूरो बांकेलाल निषाद “प्रणव”
यथार्थ गीता पाठ में पहुंचे श्री परमहंस आश्रम शक्तेषगढ़ से संत
भक्त अर्जुन यादव के घर यथार्थ गीता पाठ व भंडारे का आयोजन किया गया।
ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धर्म स्थली वाराणसी में , सदर तहसील अंतर्गत मार्कंडेय महादेव कैथी में भक्त अर्जुन यादव के घर यथार्थ गीता पाठ व भंडारे का आयोजन किया गया। इस पावन शुभ अवसर पर विश्व गुरु विश्व गौरव से सम्मानित कालजयी धर्म शास्त्र यथार्थ गीता के प्रणेता समय के तत्व द्रष्टा महापुरुष अनंत विभूषित करुणा निधान परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज की आज्ञा से मोक्षदायिनी ज्ञान गंगा केंद्र श्री परमहंस आश्रम शक्तेषगढ़ से महात्माजन का पदार्पण हुआ। जिसमें श्री लाले महाराज जी , श्री शिवानंद जी महाराज, श्री राकेशानंद जी महाराज, श्री मनीषानंद जी महाराज, एवं श्री कन्हैया महाराज जी का आगमन हुआ। अनंत जन्म जन्मांतर से पूज्य श्री गुरुदेव भगवान के परमात्मपथिक शिष्य गणों द्वारा उनका भव्य – नव्य स्वागत व वंदन किया गया। तत्पश्चात सत्यान्वेषियो संत महात्माओं का सत्संग- प्रवचन हुआ । श्री लाले महाराज जी ने बताया कि “*जिंदगी कर दो अर्पण गुरु की शरण में*” पर बोलते हुए उन्होंने बताया कि सद्गुरु की इनायत बनकर अर्थात ऐसे गुरु कि जो पूर्णत्व को प्राप्त कर लिये हैं ऐसे तत्व द्रष्टा महापुरुष की शरण- शानिध्यता में ज्यों- ज्यों अपने आपको समर्पित करते जाएंगे तो उन परम प्रभु की कृपा स्वत: मिलती जाएगी । सत्संग के अंत में उन्होंने बताया कि यथार्थ गीता पूरे संसार को पढनी चाहिए घर- घर में यथार्थ गीता होनी चाहिए और यथार्थ गीता ज्यों- ज्यों पढ़ते जाएंगे तो ईश्वरीय राह मिलती जायेगी। और भगवान के तरफ बढ़ने का मार्ग स्वयं मिल जायेगा। और श्री राकेशानंद जी ने बताया कि शास्त्र और सद्गुरु के बिना मनुष्य अंधा है और अंधे मनुष्य को सुमार्ग से कुमार्ग पर जाते देर नहीं लगेगी । इसलिए संसार में रहते भगवान की तरफ बढ़ना है तो मानव मात्र का धर्म- शास्त्र यथार्थ गीता का अध्ययन करें और तत्वदर्षी महापुरुष का शरण -सानिध्य प्राप्त करें। गीतोक्त साधना के अनुसार चलेंगे तो भगवान की कृपा मिलती रहेगी। संत श्री शिवानंद जी महाराज ने कहा कि भगवान सबके हृदय में होता है बाहर कहीं नहीं । उन्होंने भजन के माध्यम से कि *जब तक पुजबा पथरा पानी अन्तर्यामी न मिले* सैकड़ों की संख्या में उपस्थित भक्तों को बताये कि परमात्मा सबके हृदय देश में रहते हैं। इसलिए पूज्य श्री गुरुदेव भगवान के बताये मार्ग पर चल कर हृदय स्थित परमात्मा को प्राप्त करें। ईश्वर: सर्वभूतानां हृदशेअर्जुन तिष्ठंति।
भ्रामयन्सर्वभूतानि यन्त्रारूढ़ानि मायया।। सत्संग के समापन पर मनीषानंद जी महाराज ने कहा कि दाम करे सब काम कि अगर दाम है तो जीवन के हर मोड़ पर वह बढता ही जायेगा चाहे भगवत पथ हो या सांसारिक हो । उनके सत्संग का मेन प्वाइंट था कि दाम करे सब काम। उन्होंने बताया कि दाम अर्थात संपत्ति धन दौलत जो सांसारिक जीवन के लिए अति आवश्यक है लेकिन वास्तविक संपत्ति है आत्मिक संपत्ति। यही स्थिर संपत्ति है जो हमारे परमात्म पथ में ईंधन के रूप में कार्य करती है।
इसलिए पूज्य श्री स्वामी जी के शरण सानिध्य में भजन सेवा दान आदि से आत्मिक संपत्ति का अर्जन करें। यही है दाम करे सब काम। सत्संग के दौरान पूज्य श्री गुरुदेव भगवान के शिष्य गणों का शरण सानिध्य वाराणसी के भक्त विजय बहादुर सिंह उर्फ चंचल सिंह, अरविंद सिंह श्री परमहंस आश्रम शक्तेषगढ़ से आये हुए भक्त वीरु सिंह ,वनारस के भक्त अनूप यादव की पूरी टीम ने प्राप्त किया।






