आजमगढ़ ब्यूरो बांकेलाल निषाद “प्रणव”
ब्रम्हकुमारीज बहनों ने बांधी फक्कड़ बाबा व पुलिस कर्मियों को राखी।

विश्व गुरु विश्व गौरव से सम्मानित कालजयी धर्म-शास्त्र यथार्थ गीता के प्रणेता समय के तत्व द्रष्टा महापुरुष अनंत विभूषित करुणा निधान परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज के कृपापात्र शिष्य श्री फक्कड़ महाराज जी को ब्रम्हकुमारीज बहनों ने राखी बांधकर आशीर्वाद प्राप्त किया । श्री फक्कड़ महाराज जी ने बहनों को राखी के पौराणिक इतिहास महाराज बलि के समय पर विस्तार से चर्चा किये। उन्होंने रक्षाबंधन के आध्यात्मिक पहलुओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बहनों को यथार्थ गीता व अनुसुइया के महाराज जी नामक धार्मिक पुस्तकें सप्रेम भेंट किया। श्री फक्कड़ महाराज जी ने बताया कि सद्गुरु ही सृष्टि में एकमात्र सत्ता है जो भक्तों की रक्षा करता है। द्रोपदी की रक्षा उसके पांचों शूरवीर पति नहीं कर पाये लेकिन वहां सद्गुरु भगवान श्री कृष्ण ने किया। *उपद्रष्टा अनुमन्ता च भर्ता भोक्ता महेश्वर: । परमात्मेति चापयुक्तो देहेस्मिन पुरुष: पर:।।* कैसे वह सद्गुरु भक्त के साथ खड़ा रहकर रक्षा करता है। सर्वप्रथम सद्गुरु उपद्रष्टा के रूप में अर्थात बहुत ही समीप होता है फिर अनुमन्ता अनुमति प्रदान करने लगता है फिर भर्ता वही भरण पोषण करने लगता है, महेश्वर: वही साधक साधना के उन्नत अवस्था में महान ईश्वर के रूप में परिणत हो जाता है। वास्तविक रक्षा सद्गुरु करता है मां-बाप से ज्यादा जिम्मेदारी निभाता है उठते-बैठते सोते-जागते चलते-फिरते अहर्निश साधक की रक्षा सद्गुरु करता है। चूंकि वह कण-कण में विद्यमान है जहां साधक को खतरा महसूस हुआ वहीं से अपने निराकार रहनी से प्रकट हो कर आर्त साधक की मदद कर देता है। तत्पश्चात बहनों ने बसखारी थानाध्यक्ष संत कुमार सिंह समेत समस्त पुलिस स्टाफ भाइयों को राखी बांधी। राखी बांधने वाली बहनों में सोमा बहन, सरिता बहन, बीके श्रद्धा , बीके सोहानी , बीके सलोनी बहन, व बीके विशाल भाई भी उपस्थित रहे। सोमा बहन ने पुलिसकर्मियों को बताया कि रक्षा हमें अपने आपको विकारों से करनी है और बंधन अर्थात हमें सांसारिक मोह-माया के बंधन में न फंसकर परमात्मा के बंधन में बंधना चाहिए।






