अम्बेडकर नगर ब्यूरो बांकेलाल निषाद ‘प्रणव”
पुण्यतिथि पर यथार्थ गीता पाठ व भंडारे का आयोजन
जलालपुर तहसील अंतर्गत बेरगा निवासी भक्त धीरेन्द्र प्रताप सिंह के पिता स्वर्गीय राम मूरत सिंह की पुण्यतिथि पर यथार्थ गीता पाठ व भंडारे का आयोजन किया गया। लगभग बीस घंटे चले इस यथार्थ गीता पाठ के माध्यम से लोगों में यथार्थ गीता के संदेशों को प्रसारित किया गया और स्वर्गीय पिता जी जिस भी स्थिति परिस्थिति में हों उनके भी कर्णकुहरो तक गीतोक्त साधना का संदेश भगवान की कृपा से पहुंचे , और पूज्य श्री गुरुदेव भगवान की कृपा के वे भी भागी बनें। चूंकि भगवान पूज्य श्री गुरुदेव भगवान कहते हैं कि परमात्मपथ में बीज का नाश नहीं होता। सद्गुरु भगवान की कृपा से माया में दम नहीं होती कि वह धर्मोपदेश के बीजारोपण को नष्ट कर दे। पूज्य श्री गुरुदेव भगवान सूक्ष्म शरीर से हर जगह कण-कण में विद्यमान रहते हैं वे भाविकों के अगले और पिछले कई जन्मों का हाल जानते हैं उसी के अनुरूप हर जन्म में वे भाविक गण के साथ रहते हैं । अर्जुन के इसी शंका का समाधान करते हुए भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन से कहा कि हे अर्जुन !– *बहूनि मे व्यतीतानि जन्मानि तव चार्जुन*।
*तान्यहं वेद सर्वाणि न त्वं वेत्थ परन्तप।।*
मेरे और तेरे बहुत से जन्म हो चुके हैं । उन सबको तू नहीं जानता । मेरा जन्म स्थूल चक्षु से नहीं देखा जा सकता। मैं अजन्मा अव्यक्त शाश्वत होते हुए भी शरीर का आधार वाला हूं। तो कहने का अर्थ है कि हमारे अगले और पिछले जन्म का लेखा-जोखा श्री सद्गुरु के हाथ में होता है जिसका मर्म, ज्ञान गीतोक्त साधना से जाना जा सकता। जानने के लिए यथार्थ गीता जिसे पूज्य श्री गुरुदेव भगवान स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज ने भगवान के कहने से लिखा है , लिखने के लिए भगवान ने उन्हें आकाशवाणी दी। जो गीता का यथार्थ भाष्य यथार्थ गीता संसार के समक्ष प्रस्तुत है जिसके अध्ययन से हम रुढियों परम्पराओं से उपराम होकर एक परमात्मा के मार्ग के लिए प्रशस्त हो जाएंगे। इसलिए यथार्थ गीता का पठन-पाठन करें और पूज्य श्री गुरुदेव भगवान की कृपा का भागी बनें।






