सतना ब्यूरो बांकेलाल निषाद “प्रणव”
पुण्यतिथि पर करवा चौथ का संतों ने किया आध्यात्मिक व्याख्या
एमपी के सतना में स्वर्गीय हनुमान पांडे की पुण्यतिथि पर संतो का पावन पदार्पण

अहोभाग्य मुनि दर्शन दीन्हा को चरितार्थ करते हुए विश्व गुरु विश्व गौरव से सम्मानित कालजयी धर्म शास्त्र यथार्थ गीता के प्रणेता समय के तत्व द्रष्टा महापुरुष अनंत विभूषित करूणा निधान परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज के कृपापात्र शिष्यों का आगमन मध्यप्रदेश के सतना निवासी स्वर्गीय हनुमान पांडे की पुण्यतिथि पर हुआ। श्री तुलसी महाराज जी जो नेपाल में साधना रत हैं उन्होंने भक्तों को बताया कि गीतोक्त साधना के मार्ग पर चलते हुए एक परमात्मा को सद्गुरु की शरण में भजें। यथार्थ गीता के अध्ययन से दिग्भ्रमित करते वाली सामाजिक कुरीतियों का शमन होगा और एक ईश्वरीय राह का मार्ग प्रशस्त होगा। श्री परमहंस आश्रम शक्तिषगढ़ से पधारे संतों में श्री लाले महाराज जी ने बताया कि ईश्वर का वास स्थान हृदय है , एक परमात्मा ही सबके पति हैं करवा चौथ का आध्यात्मिक स्वरूप को बताते हुए उन्होंने कहा कि पत माने होता है इज्जत मान सम्मान मर्यादा को कायम रखना जो सर्वशक्तिमान है, वे ही सबके पत को रखते हैं। अन्यथा संसारी पति जो खुद अपनी रक्षा नहीं कर सकता तो वह पत्नी को कैसे रक्षित कर सकता है उदाहरणार्थ द्रोपदी के पांचों सांसारिक पति के सामने ही चीरहरण हो रहा था सब मुंडी लटकाये बैठे रहे अंत में उसकी इज्जत मर्यादा रखे तत्समय के महापुरुष समर्थ सर्वशक्तिमान भगवान श्री कृष्ण। *सहज अपावन नारि पति सेवत शुभ गति लहनी। जस गावत श्रुत चारि अजहु तुलसिका हरि प्रिया।।* कहने का आध्यात्मिक आशय है कि चित्तवृत्ति ही नारी है सबके चित्त में षडविकरों की अनंत लहरें चलती रहती हैं उन लहरों को समाप्त कर पत को रखने वाले तत्व में स्थित सद्गुरु की शरण जाएं तभी पत का मान बचेगा । श्री राजेन्द्र महाराज जी ने कहा कि *मेरे राम मेरे भगवान मैं तुमसे क्या मांगू।* पर विस्तार से बताते हुए भक्ति मांगने को कहा जिसके बिना कल्याण संभव नहीं है। श्री विनोद महाराज जी ने बताया कि एक परमात्मा के भजन के लिए सद्गुरु का शरण सानिध्य समर्पण ज़रुरी है। श्री संतों के साथ आजमगढ़ से आये भक्त राजा सिंह भी उपस्थित रहे । बब्लू पांडे कृष्णा पांडे गुड्डू पांडे आदि भक्त जन संत सेवा में लगे रहे। हजारों की संख्या में भाविक गण भोजन प्रसाद ग्रहण किये और उनमें मुफ्त यथार्थ गीता का वितरण हुआ।






