अम्बेडकर नगर ब्यूरो बांकेलाल निषाद “प्रणव”
परंपरा को तोड़ वैदिक वाङ्मय में भव्य- नव्य विवाहोत्सव दिन में संपन्न
एसिस्टेंट प्रोफेसर बृजमोहन की शादी रात्रि में वैवाहिक परंपरा को तोड़ते हुए दिन में संपन्न

परंपरा अपने आप को देश काल परिस्थिति और हालात के अनुसार अनुकूलित करता है अपने लंबे ठहराव में वह रुढ़ि का रूप धारण कर लेता है। ऐसे ही वैवाहिक परंपरा का भी सफर रहा है। वैदिक वाङ्मय और हमारी संस्कृति हमें दिन में ही वैवाहिक संस्कार को संपन्न कराने को आबद्ध करती है। राजाओं महाराजाओं का स्वंयमवर कार्यक्रम दिन में ही हुआ करता था। लेकिन विदेशी आक्रांताओं विशेषकर मुगलों के हिंदुओं के बहू बेटियों के अस्मत को लूटने की उनकी घृणित व जघन्यतम कारित घटनाओं की वजह से लोग रात्रि में वैवाहिक संस्कार संपन्न कराने लगे। इसकी बड़ी वजह थी कि आततायी दिन में संपन्न हो रहे विवाह के बीच मंडप से ही दूल्हन को जबरन उठा ले जाते थे और इसीलिए उन दिनों अपनी बेटियों को सुरक्षित रखने के लिए रात्रि में विवाह परंपरा का शुभारंभ हुआ जो बाद में परंपरा बनकर आज रूढ़ि का रूप ले ली । लेकिन आज हम आजादी के 78 वें वर्ष में लोकतंत्र की छांव में सफलतापूर्वक सांस ले रहे हैं हमें अब पुनः अपने वैदिक वाङ्मय में वापस आना होगा जिससे हमारी आने वाली पीढ़ियां हमारे सांस्कृतिक विरासत और गौरवमई इतिहास पर गर्व कर सकें। आज उसी गौरवमई इतिहास को दुहराने व रात्रि में विवाह परंपरा को तोड़ते हुए वैदिक वाङ्मय के अनुसार दिन में विवाह संपन्न कराने के लिए सेवानिवृत्त ग्राम विकास अधिकारी व परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज के अनुयाई राजित राम यादव ने सराहनीय कार्य किया। जनपद अम्बेडकर नगर के तहसील आलापुर अंतर्गत लखनीपट्टी निवासी राजित राम यादव के सुपुत्र एसिस्टेंट प्रोफेसर बृजमोहन का विवाह वैदिक वाङ्मय में भव्य- नव्य
विवाहोत्सव सकुशल दिन में ही संपन्न हो गया। वारात लगभग 11 दिन में शादीपुर निवासी रामदरश यादव के घर समय से पहुंच चुकी थी और विवाह उनकी सुपुत्री कुमकुम यादव के साथ सकुशल संपन्न हुआ । यह शुभ विवाह विश्व गुरु विश्व गौरव से सम्मानित यथार्थ गीता के प्रणेता समय के तत्व द्रष्टा महापुरुष परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज के विराट आध्यात्मिक आभा की छाया में शांति कुंज हरिद्वार के प्रज्ञा पुत्रों बीरेंद्र यादव, राजेश यादव , राजित राम चौहान, ओमकार मौर्य, हौसिला प्रसाद गुप्ता द्वारा संपन्न हुआ। जयचंद यादव ने अपने संगीत की टोली के साथ पूरे विवाह के दौरान संगीत की सुरम्यता में बारातियों एवं घरातियों को बांधे रखा। यह वैवाहिक कार्यक्रम लगभग तीन घंटे चला। सैकड़ों बारातियों एवं घरातियों से खचाखच भरा पंडाल पूरे विवाह के दौरान खुशनुमा रंग में रंगा हुआ था आधे से ज्यादा संख्या में मां बहनें मौजूद रही सब के चेहरे पर खुशियों की लहर थी। सबके अंदर दिन में हो रहे इस विवाह कार्यक्रम के प्रति आकर्षण विशेष था । काफी लोगों ने इस वैवाहिक कार्यक्रम को संपन्न कराने में होने वाली व्यवस्था के प्रति रूझान जाहिर किया। इस शुभ अवसर पर यथार्थ गीता व भजन किसका करें नामक धार्मिक पुस्तक का इच्छुक लोगों में मुफ्त में वितरण किया गया ।






