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सम्पादक देवेन्द्र राय

March 23, 2026 6:44 am

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पत्नी नहीं बन सकेगी मां, बात पता चली तो पति पहुंच गया कोर्ट, HC ने किया यह काम

Madras High Court: मद्रास हाई कोर्ट ने हाल ही में ओवरियन कैंसर के कारण गर्भाशय निकाले जाने पर अपना फैसला सुनाया है. कोर्ट का कहना है कि इसे पति के प्रति क्रूरता तो क्या ‘मानसिक क्रूरता’ भी नहीं माना जा सकता. न्यायालय ने तर्क दिया कि यह ‘पत्नी का कार्य नहीं है, ब्लकि यह भाग्य पर है.’  हाई कोर्ट ने एक तलाक याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की.

न्यायमूर्ति  RMT टीका रमन और न्यायमूर्ति पीबी बालाजी की पीठ ने पारिवारिक अदालत में पति द्वारा दायर तलाक की याचिका को खारिज करते हुए यह बात कही. पति ने ट्रायल कोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि शादी से पहले ही उसकी पत्नी कैंसर से पीड़ित थी और उसने इस तथ्य को छुपाया था. इसलिए, बच्चे को जन्म देने की क्षमता पत्नी में नहीं थी. पारिवारिक अदालत में बताया गया कि शादी से पहले पत्नी में कैंसर के कोई लक्षण नहीं थे. इसलिए, पति की याचिका खारिज कर दी थी.

अदालत ने तीन मुख्य सवालों पर ध्यान केंद्रित करते हुए अपील पर सुनवाई करने का फैसला किया: क्या गर्भाशय निकालना पति के प्रति क्रूरता है, अगर पत्नी अपने माता-पिता के पास रहती है; उसके इलाज के लिए घर छोड़ना परित्याग के समान है, और क्या पति पत्नी के गर्भाशय को हटाने के बाद संतान की संभावना खोने से उत्पन्न मानसिक क्रूरता के आधार पर तालाक की मांग कर सकता है?

दलीलें सुनने और सबूतों पर गौर करने के बाद, अदालत ने तीनों सवालों का नकारात्मक जवाब दिया. अदालत ने कहा कि सबूतों से संकेत मिलता है कि पति ने तलाक के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, ऐसा प्रतीत होता है कि परिवार के कुछ सदस्यों ने उसे प्रेरित किया था. अदालत ने इस बात पर प्रकाश डाला कि पति ने स्वीकार किया था कि सरोगेसी विधि के माध्यम से संतान पैदा करने की संभावना थी और वह सरोगेसी के लिए इच्छुक था.

पत्नी नहीं बन सकेगी मां, बात पता चली तो पति पहुंच गया कोर्ट, HC ने किया यह काम

जस्टिस आरएमटी टीका रमन और जस्टिस पीबी बालाजी की खंडपीठ ने पारिवारिक अदालत के फैसले पर मुहर लगाते हुए याचिकाकर्ता की अर्जी खारिज कर दी. पति ने तर्क दिया कि उनकी पत्नी का गर्भाशय निकाले जाने के बाद बच्चे पैदा करने में असमर्थता हिंदू विवाह अधिनियम के तहत परिभाषित मानसिक क्रूरता के समान है. इसके बावजूद हाई कोर्ट ने माना कि पारिवारिक अदालत ने ऐसी याचिका को खारिज करके सही किया है क्योंकि महिला को उसकी शादी के बाद कैंसर का पता चला था. हाई कोर्ट ने कहा कि शादी से पहले उसमें कैंसर के कोई लक्षण नहीं थे, इसलिए, यह नहीं कहा जा सकता कि उसने कोई चिकित्सीय जानकारी छिपाई थी.

Tags: Cancer, Madras high court, Mother

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Author: NM News live

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