मिर्जापुर ब्यूरो बांकेलाल निषाद “प्रणव”
जस्टिस श्री प्रकाश सिंह ने स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज से लिये आशीर्वाद
जिला जज अरविंद मिश्रा भी रहे मौजूद

लखनऊ हाईकोर्ट के जस्टिस श्री प्रकाश सिंह आज विश्व गुरु विश्व गौरव से सम्मानित कालजयी धर्म शास्त्र यथार्थ गीता के प्रणेता समय के तत्व द्रष्टा महापुरुष अनंत विभूषित करूणा निधान परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज का दर्शन-पूजन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किये। उनके साथ में जिला जज अरविंद मिश्रा भी मौजूद रहे। इस शुभ अवसर पूज्य श्री गुरुदेव भगवान ने उन्हें बताया कि जस्टिस एक बहुत ही जिम्मेदारी का पद होता है जो गवाह साक्ष्य मेडिकल रिपोर्ट आदि के आधार पर न्याय प्रभावित हो जाता है। लेकिन दुनिया का सबसे बड़ा जज एकमात्र परमात्मा है जिसके पास हमारे अनंत जन्मों का लेखा-जोखा है और जब भाविक साधक अपने जन्म-जन्मांतर के लेखा-जोखा से अच्छे-बुरे कर्मों से पाप-पुण्य के बंधन से मुक्त होते नहीं देखता तो वह सद्गुरु की शरण में जाता है। सद्गुरु ही उस भाविक के उस साधक के जन्म-जन्मांतर के पाप-पुण्य अच्छे – बुरे कर्मों के बंधन से मुक्ति के लिए साधक के ह्दय से रथी होकर मार्गदर्शन योगक्षेम करते हैं। सद्गुरु यह बुरा है यह अच्छा है यह विद्या है यह अविद्या है का भान कराते हुए प्रकृति के खोहखंद मायिक बंधन से मुक्त कर परमात्मा के शास्वत साम्राज्य में पहुंचा देते हैं। यही उस साधक के प्रति भाविक के प्रति परमात्मा सद्गुरु न्याय करते हुए उसे अपनी स्थिति प्रदान कर देते हैं। पूज्य श्री गुरुदेव भगवान ने बताया कि सद्गुरु में वह क्षमता होती है कि दुनिया का मोस्ट वांटेड अपराधी ही क्यों न हो सद्गुरु की शरण आने से वाल्मीकि अंगुलिमाल की तरह वह अरिहंत हो जाता है। दुनिया के निगाह में वह पापी होगा जघन्यतम अपराधी होगा लेकिन जहां वह अपनी अपराध की दुनिया छोड़कर परमात्मा की दुनिया में घुसा तो वहीं से सद्गुरु कृपा से उसके जन्म-जन्मांतर के संस्कार भस्मसात हो जाते हैं। पूज्य श्री गुरुदेव भगवान ने जस्टिस श्री प्रकाश सिंह व जिला जज अरविंद मिश्रा को बताये कि ओम् का जप करें और सद्गुरु का ध्यान करें *ओमित्याकाक्षरं ब्रह्म व्याहरन्मामस्मुरन। या प्रयाति त्यजन्देहं स याति परमां गतिम्।।* ऐसा करने से दो से तीन महीने के अंदर सद्गुरु हृदय से रथी होकर मार्गदर्शन करने लगेंगे उठायेंगे बैठायेंगे सोवायेंगे जगाएंगे हर पल आपके आगे-पीछे लगे रहेंगे। भगवान और भक्त का यह साथ जन्म-जन्मांतर चलता रहता है ये तब तक चलेगा कि जब तक भगवान अपनी स्थिति न प्रदान कर दे। पूज्य श्री गुरुदेव भगवान के आदेश से उनके कृपापात्र शिष्य श्री नारद जी महाराज द्वारा दोनों जजों को यथार्थ गीता सप्रेम भेंट किया गया। उन्हें यथार्थ गीता को कम से कम चार बार आवृत्ति के लिए कहा गया जिससे गीतोक्त साधना के पथ पर चलने का मार्गदर्शन मिल सके।






