आजमगढ़ ब्यूरो बांकेलाल निषाद “प्रणव”
कुछेक भारत को हिंदू राष्ट्र बनाना चाहते हैं और स्वामी जी भारत को विश्व गुरु — श्रद्धा महाराज जी
विश्व गुरु विश्व गौरव से सम्मानित कालजयी धर्म शास्त्र यथार्थ गीता के प्रणेता समय के तत्व द्रष्टा महापुरुष अनंत विभूषित करुणा निधान परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज जी के कृपा पात्र शिष्य बिहार के रानी सराय बख्तियारपुर से चलकर आये श्रद्धा महाराज जी ने सैकड़ों भक्तों को बताये कि भारत के कुछेक संकुचित मानसिकता के लोगों की इच्छा है कि भारत हिंदू राष्ट्र बनें जब कि हमारे पूज्य श्री गुरुदेव भगवान परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज न केवल भारत को बल्कि इस देश में रहने वाला हर बच्चे को विश्व गुरु बनाने में लगे हैं। उन्होंने बताया कि हिंदू राष्ट्र बहुत ही छोटी उपाधि है पदवी है छोटी मानसिकता है, जबकि “विश्व गुरु” वृहद भारत, सर्वश्रेष्ठ भारत, शास्वत भारत, सनातन भारत, चिरस्मरणीय भारत को प्रतिबिंबित करता है। हमारे अनादिकालीन ऋषि-मुनियों ने जो भी वाणी बोले वह पूरे विश्व को समेकित करते हुए बोले भगवान राम और भगवान श्रीकृष्ण तत्समय के चक्रवर्ती अर्थात पूरे विश्व के राजा थे वे राज राजेश्वर कहे जाते हैं उन्हीं की वाणी को 1893 में शिकागो धर्म सम्मेलन में स्वामी विवेकानंद ने दुहराया और भारत को विश्व गुरु की पदवी मिली। पूछने पर कि ये कैसे संभव होगा तो उन्होंने बताया कि हमें पूज्य श्री गुरुदेव भगवान के मुखारबिंद से नि:सृत ईश्वरीय वाणी यथार्थ गीता में बताये मार्ग पर चलने की
आवश्यकता है और जो जहां भी है जिस भी देश काल परिस्थिति में है वो वहीं यथार्थ गीता की वाणी को फैलाये, यथार्थ गीता की वाणी को फ़ैलाने वाला और वाणी को सुनने वाला दोनों के हृदय में पूज्य श्री गुरुदेव भगवान प्रेरक बनकर मार्गदर्शन करने लगेंगे चूंकि पूज्य श्री गुरुदेव भगवान विश्व के कण-कण में व्याप्त है वे वहीं से हृदय से रथी होकर पूरे विश्व में जागृत हो जायेगें बसर्ते कि गीतोक्त साधना का पालन करें। उन्होंने बताया कि भारत कनफुकवा गुरु से विश्व गुरु नहीं बनेगा भारत पूज्य श्री गुरुदेव भगवान की कृपा उनकी गीतोक्त साधना से विश्व गुरु बनेगा। उन्होंने बताया कि गीता आदि धर्म- शास्त्र है इसी की वाणी को ईसा मूसा कबीर तुलसी रैदास आदि महापुरुषों ने बताया है कोई नई चीज नहीं। उन्होंने बताया कि यथार्थ गीता पूज्य श्री गुरुदेव भगवान ईश्वरीय आदेश से लिखा है इसमें एक ईश्वर एक धर्म ईश्वर को पाने का एक मार्ग एक कर्म एक यज्ञ आदि का वर्णन है। यह पूर्णतः मजहब मुक्त मानव मात्र के लिए है। यह किसी विशेष जाति धर्म की हिमायती नहीं है यह विश्व में बसे मानव के मोक्ष हितार्थ बात करती है इसलिए यह ईश्वरीय वाणी है। श्री श्रद्धा महाराज जी ने बताया कि हमें भारत को पूज्य श्री गुरुदेव भगवान के मिशन में शामिल होकर भारत के बच्चे – बच्चे को विश्व गुरु बनाने में लग जाना चाहिए। श्री श्रद्धा महाराज जनपद आजमगढ़ के तहसील बूढ़नपुर अंतर्गत कमालपुर गोपालीपट्टी भक्त सुरेश पाल के घर बहुभोज के शुभ अवसर पर यथार्थ गीता पाठ में पहुंचे थे।








