अम्बेडकर नगर ब्यूरो बांकेलाल निषाद “प्रणव”
एसिस्टेंट प्रोफेसर के विवाहोत्सव पूर्व व जन्मदिन पर यथार्थ गीता पाठ।
यथार्थ गीता पाठ कराने के अनंत लाभ।
जनपद अम्बेडकर नगर के आलापुर तहसील अंतर्गत ग्राम सभा लखनीपट्टी निवासी ग्राम विकास अधिकारी राजित राम यादव के सुपुत्र एसिस्टेंट प्रोफेसर डाक्टर बृजमोहन के विवाहोत्सव पूर्व व उनके नाती के जन्मदिन पर यथार्थ गीता पाठ, वितरण व विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। विश्व विदित है कि हमारा देश भारत खुद आध्यात्मिक खजाने का अथाह सागर है जो विश्व के लिए अनुकरणीय है । इसीलिए ग्राम विकास अधिकारी राजितराम ने अपने नाती के जन्मदिन पर और अपने सुपुत्र के विवाहोत्सव पूर्व यथार्थ गीता पाठ का आयोजन कराने का शुभ कार्य किया। इतना ही नहीं वे अपने सुपुत्र की शादी वैदिक परंपरा से दिन में ही कराने का कार्यक्रम बनाये हैं। गीता श्लोकों का मंत्रोच्चारण कर उन्होंने जन्मदिन भी मनाया जो उन भक्तों के लिए अनुकरणीय है जो पश्चिम परंपरा में जन्मदिन मनाते है। सेवानिवृत्त राजित राम का पूरा परिवार गीतोक्त साधना में रमण करने वाला व पूज्य श्री के कृपापात्र हैं । उनके परिवार में बड़े सुपुत्र कृष्ण मोहन सीआरपीएफ इंस्पेक्टर हैं और उनकी बहू डीआरडी मेडिकल कॉलेज में नर्सिंग आफीसर हैं, सुपुत्र शत्रुघ्न यादव
इलाहाबाद हाईकोर्ट में प्रेक्टिसनर हैं, सुपुत्र रमाकांत कुशीनगर में बोल्ट आफीसर हैं व सबसे छोटी सुपुत्री इलाहाबाद विश्वविद्यालय की विधि स्नातक छात्रा है । यथार्थ गीता पाठ कराने के लाभ –* आइये जानते हैं पूज्य श्री गुरुदेव भगवान स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज के पावन अमृत वाणी में यथार्थ गीता पाठ कराने के लाभ। मांगलिक कार्यों पर यथार्थ गीता पाठ कराने से आस-पास के नकारात्मक ऊर्जा का सर्वनाश हो जाता है अर्थात उसकी जगह सकारात्मक ऊर्जा ले लेती है। पूरा वातावरण दिव्य व मांगलिक हो जाता है तथा आशीर्वाद स्वरूप यथार्थ गीता के दिव्य श्लोकों के मंत्रोच्चारण से आप्लावित भजन के परमाणु व्याप्त रहते हैं। फिर पूछना ही क्या है? जहां यथार्थ गीता पाठ वहीं सद्गुरु और वहीं भगवान। फिर जहां भगवान सद्गुरु के गायन में यथार्थ गीता पाठ होगा तो वहीं पर भगवान लक्ष्मी सहित वास करेंगे; और जहां वे वास करेंगे तो वहीं शुख समृद्धि संपदा धन धान्य से परिपूर्ण होगी । दूसरी तरफ जब भक्त यथार्थ गीता पाठ सकुशल संपन्न कराने के बाद, गद्दी पर चढ़े हुए प्रसाद को लेकर पूज्य श्री के चरणों में चढ़ाते हैं तो करुणा निधान पूज्य श्री गुरुदेव भगवान की मुखारविंद से निकली अमृतवाणी और आशीर्वाद की मुद्रा में उनके कोमल हाथ स्वत: उठ जाते हैं और वे कृपा के अथाह सागर दृष्टिपात कर अपने दीन-हीन भक्त के जन्म-जन्मांतर के संस्कारों को भष्मासात कर उसे सुखित कर देते हैं। भरत जी खड़ाऊं की तरह पूज्य श्री के आशीर्वाद को शिरोधार्य कर वह भक्त अपने आप को उनकी कृपा के सागर में गोता लगाता रहता है। पूज्य श्री का वह आशीर्वाद सदा -सदा के लिए उस भक्त के साथ साये की तरह मार्गदर्शन करता है संरक्षण करता है, और जन्म जन्मांतर तक परमात्मा की पूर्तिपर्यंत तक साथ रहता है । अनंत विभूषित परमहंस स्वामी श्री सरकार की रचित
श्रीमद्भागवत गीता भाष्य यथार्थ गीता सृष्टि में एक दुर्लभ धर्म शास्त्र व संसार के लिए ईश्वरीय आशीर्वाद है। यथार्थ गीता के प्रणेता त्रिकालज्ञ परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज कहते हैं कि यह सर्वग्राह्य सार्वभौमिक सर्वकालिक मानवमात्र का धर्म-शास्त्र है: यह संसार को प्राप्त एक ऐसा ईश्वरीय वरदान है कि जो मानव – मानव में रंग- भेद , जाति, छुआछूत आदि आधारित भेद नहीं करता । यह संसार का है और संसार इसका है इस सिद्धांत पर अटल है। अपने आप में सुस्पष्ट यथार्थवादी होने के कारण इसमें समाज को बांटने वाली गुंजाइश बिल्कुल नहीं है इसीलिए इनके शब्द जिन भी जन के कर्णकुहरों में पड़ते हैं तो उनमें इंसानियत के मानवता के संस्कारों का बीजारोपण हो जाता है। धर्म के सियासी ठेकेदारों विधर्मियों के भ्रमजाल का उन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। इसका पाठ कराने से इसकी गूंज जहां तक सुनाई देती है उनके कर्णकुहरों में एक मात्र परमात्मा की भक्ति का बीजारोपण हो जाता है, संचार हो जाता है। बचपन से पीछा किये कुरुतियों कर्मकांडों पाखंड से मुक्ति मिल जाती है। अंतःकरण की भ्रांतियों का शमन हो जाता है। संसार के सर्वोपरि महान दानवीर पूज्य श्री गुरुदेव भगवान की कृपा से सब के सब आध्यात्म के वास्तविक स्वरूप से अवगत हो जाते हैं । यथार्थ गीता पाठ से अज्ञान से आच्छादित अंधकार का स्थान ज्ञान रुपी प्रकाश ले लेता है।






