संपादकीय द्वारा वरिष्ठ पत्रकार एवं चिंतक बांकेलाल निषाद “प्रणव”
अटल से मोदी सफर, आपरेशन सिंदूर! आतंक के विनाश में विदुर की नीति ।
कृते प्रतिकृते कुर्याद्विसिते प्रतिहिंसितम्।
तत्र दोषं न पश्यामि शठे शाठ्यं समाचरेत।।
विदुर नीति अर्थात जो जैसा करे उसके साथ वैसा ही करो। जो तुम्हारी हिंसा करता है तुम भी उसकी हिंसा करो! इसमें मैं कोई दोष नहीं मानता शठ के साथ शठता ही करने में उपाय पक्ष का लाभ है।

दुनिया में आतंक के आका के नाम से बदनाम पाकिस्तान के आतंक की फैक्ट्री से निकलकर 26/ 11 मुंबई हमला, भारतीय संसद , अक्षरधाम मंदिर, उरी , पुलवामा , पहलगाम इत्यादि वारदात के जरिए भारत को बर्बाद करने व उसके अस्तित्व को मिटाने को संकल्पित आतंकिस्तान पर जब तक हम उसका समूल विनाश नहीं करेंगे तब तक उनका हमला हम पर जारी रहेगा। इतिहास गवाह है कि भारत ही नहीं पूरा विश्व इनके आतंक के साये में सांस ले रहा है। अमेरिका इजरायल ब्रिटेन फ्रांस इत्यादि जैसे शक्तिशाली देश इनसे त्रस्त हैं। पूरी दुनिया में आतंक को प्रोवाइड पाकिस्तान करता है। ओसामा बिन लादेन जो 9/ 11 का गुनहगार है अमेरिका का मोस्ट वांटेड था वो पाकिस्तान में मिला। पाकिस्तान में कुकुरमुत्ते की तरह तमाम आतंकियों के टेरर कैंप खुले हुए हैं। यहां तक कि इजरायल के आतंकी दुश्मन हमास की एंट्री पाकिस्तान में हो चुकी है। भारत से सटे पाकिस्तान में पल रहे ये सभी आतंकी भारत के लिए सरदर्द बने हुए हैं। रह- रह कर कभी अक्षरधाम मंदिर तो कभी 26,11 तो कभी पुलवामा तो कभी पहलगाम के नाम से दर्द भारत को मिलता रहा है। आतंक के प्रति हमारी ढुलमुल नीति के चलते धीरे-धीरे यह दर्द बढ़ता ही जा रहा है। इन आतंकियों का कोई कैरेक्टर नहीं है ये बिना दिल के होते हैं , बेरहम चेहरा होता है इनका। मासूमियत की हत्या करके जन्नत में जाना ये अपना धर्म समझते हैं, काफिर, तलवार के बल पर इस्लाम कबूल, पूरी दुनिया को तबाह – बर्बाद करना ही इनके ब्लड में है बचपन से इन्हें इसी की ट्रेनिंग दी जाती है । पाकिस्तान इनको आगे करके भारत पर प्राक्सी वार आजादी के बाद से ही चला रहा है । पाकिस्तान की आर्मी इन आतंकियों के मां – बाप हैं। पाक आर्मी और आईएसआई के माध्यम से ये आतंकी भारत में अपने कुत्सित कार्यों को अंजाम देते हैं। फिर जब भारत इनके खिलाफ कड़ा एक्शन लेता है तो पाकिस्तान को मिर्ची लगने लगती है उसके पिछवाड़े में चूना काटने लगता है। आपरेशन सिंदूर इसका ज्वलंत उदाहरण है। आपरेशन सिंदूर में मरे आतंकियों के जनाजे में पाक आर्मी ऐसी दुखी हो कर खड़ी है कि मानो उनका इकलौता बेटा मारा गया है। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि आतंकवादी और पाक आर्मी दोनों एक सिक्के के दो पहलू हैं। हमारे लिए जितना दोषी पाक में पल रहे आतंकी हैं उतने ही दोषी उनके पनाहगार पाक आर्मी भी है। इसलिए इन दोनों को सबक सिखाना भारत के लिए जरूरी है। इनके लिए बुद्ध का उपदेश काम नहीं करेगा ये लातों के भूत है बातों से नहीं मानने वाले हैं। धैर्य का सब्र भारत को तोड़ना होगा। हमें कारगिल से आगे निकलना होगा। आपरेशन सिंदूर को आगे बढ़ाना होगा ; लक्ष्य केवल टेरर कैंप तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए हमारे हमले का असर उनके पनाहगार तक होने चाहिए। इनका खात्मा हमारे लिए एक चुनौती है अन्यथा शांति दूत भारत को ये अशांत करते रहेंगे और हमको अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कमजोर दिखाते रहेंगे। पहलगाम हमले के बाद सिंधु जल समझौता को रद्द कर पाक के अर्थ व्यवस्था की रीढ़ को तोडना, कूटनीतिक स्तर से अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान को अलग-थलग करके दुनिया को अपने फेवर में करना और फिर पाकिस्तान के अंदर घुसकर पाक आर्मी के आकाओं के टेरर कैंप को उड़ाना भारतीय सेना और पालिटिकल स्ट्रैटेजिक की सुंदर पहल है। ऐसे ही जवाब से भारत का सर अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में ऊंचा रहेगा। ऐसी ही कार्यवाही से पाकिस्तान के पालतू गीदड़ों को सबक मिलेगा। चूंकि हमने वो कारगिल दौर भी देखा है कि जब हम बिना बार्डर पार किये ही बड़ी मुश्किल से कारगिल को खाली करा पाये थे; सेना की इच्छा के विपरीत तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल जी बार्डर क्रास का आदेश नहीं दिये थे । हमने कंधार हाइजैक भी देखा है कि हमारे तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल जी ने 170 यात्रियों के बदले तीन खूंखार आतंकवादियों को छोड़ा था जिसमें एक खूंखार आतंकी मसूद अजहर भी था और वही मसूद अजहर छूटने के बाद भारतीय संसद , मुंबई, पठानकोट पूलवामा पहलगाम हमले के अंजाम में उसका हाथ रहा। इन वारदातों को अंजाम देने में कितने मासूमों को बेरहमी से मारकर उनके पारिवारिक बगिया में आग लगाने का काम किया। और आज जब पहलगाम हमले के बदले में उसके 14 परिवार की जान गई तो इंशाअल्लाह से अपने मौत की भीख मांग रहा है कि या अल्लाह क्यों न मुझे भी उठा लेते! । मसूद अजहर जैसे आततायी आतंकी कितनों का आज तक सिंदूर उजाड़ा, कितनी मांओं की गोद उजाड़ा, कितनी बहनों की राखी छीनी, कितनो की कोख सूना किया, कितने कंधों को बेसहारा किया और आज जब उसका परिवार उजड़ा तब उसे आभास हुआ कि परिवार उजड़ने की पीड़ा क्या होती है? जांबाज भारतीय सेना और हमारे जांबाज प्रधानमंत्री मोदी की मजबूत आत्मबल और शौर्य से आज मसूद अजहर जैसे मानवता के शत्रु आततायी को पारिवारिक खात्मे के दर्द को आभास दिलाये इसके लिए भारतीय सेना और मोदी जी की टीम अजीत डोभाल और देश के विपक्षी दलों व देशवासियों को बहुत- बहुत धन्यवाद व बधाइयां। लेकिन हमें जब तक आतंक का समूल खात्मा न हो जाए तब तक आपरेशन सिंदूर को जारी रखना चाहिए। हमें आतंक के सफाया करने में इजरायल मेथड पर काम करना होगा। आतंक रूपी सांप को घायल करके हमें छोड़ने की भूल नहीं करनी चाहिए उसके फन को कुचल देना है ताकि हमारी आने वाली पीढ़ियों को एक स्थायी शांति और सुकून मिल सके। हमें इस घायल सांप को भविष्य की पीढ़ियों को दर्द देने के लिए नहीं छोड़ना है। नहीं तो आज जैसे नेहरू की अदूरदर्शिता के कारण कश्मीर समस्या को लेकर देश झेल रहा है वैसे ही आतंक के इस विषैले जहर को हमारी आने वाली पीढ़ियां झेलेंगी । लोहा गर्म है हथौड़ा लगातार चलता रहे। आज इस मौके पर विश्व बिरादरी हमारे साथ है हमारी सफल कूटनीति के चलते पाकिस्तान हमसे चौतरफा घिर चुका है, पाकिस्तान आर्थिक बदहाली में जी रहा है हमारे देश की जनता भी पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए अंगड़ाइयां ले रही है। हमारी सेना के शौर्य और पराक्रम को विश्व बिरादरी आज बड़े ही सम्मान से देख रही है। बस जरूरत है मोदी जी की “कल्पना से परे हमले” को आतंकियों और उनके पनाहगारों के खात्मे तक जारी रहने की। आज अटल से मोदी सफर का दौर है । आज भारत आत्मनिर्भर, मजबूत अर्थव्यवस्था, विश्व की चौथी महाशक्ति है विश्व भारत को बड़े ही सम्मान की नजरिए से देख रहा है। आज हम अत्याधुनिक हथियारों से लैस है हमने 1948, 1965, 1971, 1999, में पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया है लेकिन ये गीदड़ फिर भी अपनी हरकत से बाज नहीं आया। इसलिए हमें इस जंग को भविष्य की पीढ़ियों पर छोड़ने की जरूरत नहीं है हमें अभी और इसी वक्त आतंक और उसके पनाहगार को खात्में के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए जंग जारी रखनी है। काल करे सो आज कर आज करे सो अब।
पल में प्रलय होएगी बहुरि करोगे कब?।।






