अम्बेडकर नगर ब्यूरो बांकेलाल निषाद “प्रणव”
जाने-माने वासुरी वादक मुकेश ‘मधुर’ ने नीबू के अर्क से अद्भुत चित्रकारी कर चौकाया।
कला की दुनिया में जहां रंग और ब्रश के सहारे कैनवास सजाया जाता है, वहीं जिले के प्रतिभाशाली चित्रकार व सुप्रसिद्ध बांसुरी वादक मुकेश मधुर ने अपनी अनूठी कला से सभी को चौंका दिया। उन्होंने बंद आंखों से केवल नीबू के अर्क (रस) का उपयोग कर कागज पर रेखांकन किया और बाद में कागज को हल्की आग की तपिश देने पर चित्र स्वयं उभर कर सामने आ गया। इस अद्भुत प्रयोग को देख लोग आश्चर्यचकित रह गए। मुकेश मधुर ने बताया कि नीबू का रस कागज पर सामान्यतः दिखाई नहीं देता, लेकिन जब उसे हल्की गर्मी दी जाती है तो रासायनिक प्रतिक्रिया के कारण रेखाएं भूरा रंग लेकर स्पष्ट हो जाती हैं। इसी सिद्धांत पर उन्होंने बंद आंखों से अपनी कल्पना को कागज पर उतारा। आग की सेंक मिलने के बाद जब चित्र उभरा तो लोगों ने इसे कला और विज्ञान का अनोखा संगम बताया।
लोगों ने मुकेश मधुर की इस अनूठी प्रस्तुति की सराहना की और कहा कि यह केवल चित्रकला नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और रंगों की कठिन साधना का परिणाम है। बंद आंखों से चित्र बनाना अपने आप में असम्भव जैसा कार्य है, उस पर अदृश्य स्याही के रूप में नीबू के रस का प्रयोग इसे और भी चुनौतीपूर्ण बना देता है।
कला प्रेमियों का कहना है कि मुकेश मधुर का यह प्रयोग युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। सीमित संसाधनों में भी रचनात्मकता के जरिए असंभव को संभव बनाया जा सकता है। उनकी इस अनूठी कला ने साबित कर दिया कि सच्चा कलाकार अपनी कल्पना और हुनर से किसी भी सीमा को पार कर सकता है। चित्रकार मुकेश “मधुर की सोंच सीमाओं से परे है।






