चार भाषाओं के ज्ञाता – सरदार सिंह राय’ सर ‘जौनसारी
सम्पादक, देवेन्द्र सिंह राय
उत्तराखंड देहरादून
बहुमुखी प्रतिभा के धनी सरदार सिंह राय जितनी अच्छी हिंदी जानते थे उतनी अच्छी अंग्रेजी के भी ज्ञाता थे उर्दू में उनके द्वारा की गई शायरी आज भी शोध का विषय है उच्च कोटि के साहित्यकार एवं लेखक थे इनका जन्म उत्दपालटा में 2 अक्टूबर 1929 को हुआ था तथा मृत्यु 7 जनवरी 2003 में एक निजी अस्पताल देहरादून में हुई। एस एस राय जौनसार बावर व देहरादून जिले में सम्मानित एवं लोकप्रिय व्यक्ति थे 
सरदार सिंह राय (एस एस राय ) ‘सर’ जौनसारी
1978″ नया जमाना “साप्ताहिक समाचार पत्र
राय साहब” सर “जौनसारी देहरादून जनपद के जौनसार बावर क्षेत्र से काफी लंबे समय से “नया जमाना” साप्ताहिक के अनैतिक संवाददाता के रूप में भी कार्य करते रहे” सर” जौनसारी उपनाम से भी लेख आदि लिखते रहे हैं अपने क्षेत्र में वह एक प्रभावशाली व्यक्ति माने जाते थे और जौनसार बावर के सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहते थे

“वैन गार्ड “साप्ताहिक समाचार पत्र
1978
राय साहब” सर “जौनसारी जनपद देहरादून के एक प्रतिष्ठित तथा लोकप्रिय व्यक्ति थे राय साहब विद्यार्थी जीवन से ही साहित्य प्रेमी रहे तथा समय-समय पर हिंदी, उर्दू, अंग्रेजी में लेख कविताएं कहानियां आदि लिखते रहते थे उनकी रचनाएं समय-समय पर “सर” जौनसारी के उपनाम से वैन गार्ड सप्ताहिक की हिंदी अंग्रेजी अनुभागों में भी प्रकाशित होती रहती थी उनकी साहित्यिक सेवाओं से असंख्य पाठक लाभार्थी होते रहते थे।
जौनसार मेल साप्ताहिक समाचार पत्र के लिए भी लेख लिखा करते थे
लगभग 45 वर्ष पहले हिंदी की एक प्रसिद्ध पत्रिका कादंबरी में एक लेख छापा था ‘एक विद्यार्थी का मासिक खर्च’ यह लेख इतना लोकप्रिय हुआ कि ‘कादंबरी ‘के उस अंक की सभी प्रतिया बिक गई वह संपादक को उस अंक का दूसरा संस्करण छापना पड़ा क्या आप जानते हैं कि यह लेख किस प्रतिभाशाली लेखक ने लिखा था जी हां इस प्रसिद्ध कीर्ति के लेखक थे सर जौनसारी यानी एस एस एस राय ग्राम उत्पालटा जो आशाराम
बेदिक इंटर कॉलेज विकास नगर में अंग्रेजी के विख्यात प्रवक्ता थे बिलाशक वह अभी तक पैदा हुए जौनसार बावर मूघनयतम विद्वान थे अंग्रेजी व उर्दू पर उन्हें विशेष महारत हासिल था हिंदी फारसी का भी उनका ज्ञान कम ना था। उन्होंने विद्यार्थी जीवन से ही उर्दू में शायरी लिखनी प्रारंभ कर दी थी जो बाकायदा मुशायरों में पढ़ी जाती थी और उर्दू रियासतों में छपती भी थी आजादी की जद्दोजहद के दौरान उनकी जोशीली नज्में ‘अगर है तो खुद बढ़ कर उठा ले जाम ए आजादी ‘को कौन भूल सकता है ?इसी प्रकार उनकी कुछ रूमाली नज्में भी कोई भूल नहीं सकता ?मिसाल के तौर पर उनकी निम्न कुछ नज्में तो हर किसी की जुबान पर हर वक्त रहती थी
(A) क्यों जाऊं मैं उनकी महफिल में, पैगाम ए मोहब्बत क्यों भेजूं?
अगर मिलना होगा उनको तो ,खुद ही इशारा कर लेंगे
(B) करते देखा है जिन्हें अपनी मोहब्बत पर नाज
उनके महबूब को गैरों के पहलू में दराज देखो।
वहां भी वही इकरारे मोहब्बत के तबस्सुम,
वही नाच वही अदा वही अंदाज देखा।
‘सर ‘जौनसारी साहब केवल शायर ही नहीं थे वह विदता पूर्ण लाजवाब लेख भी लिखते थे ‘जन्नत में हिंदुस्तान का पहला वह आखिरी सफर ‘हमारे नेताओं के लटके झटके आदि लेख बहुत मकबूल हुए थे राय साहब एस एस राय हां इसी नाम से विख्यात थे। सन 1946 से सन 1999 तक अनवरत साहित्य सृजन करते रहे ।पर यह अमूल्य निधि आज की जौनसारी पीढ़ी को सहज उपलब्ध नहीं क्योंकि उनका संकलन नहीं हुआ।
जौनसारी साहित्यकारों में हिंदी में जो उच्च स्थान पंडित शिवराम जी को प्राप्त है वही उर्दू में श्री सरदार सिंह राय’ सर’जौनसारी को प्राप्त है दोनों की रचनाओं में एक से एक अनमोल हीरे हैं ।दोनों ही मौलिक रचनाकार थे और वह भी उच्च कोटि के ।लेकिन दुर्भाग्य है तो यही कि मोती कहीं बिखर ही ना जाए और कालांतर में विस्मृति की गोद में ना समा जाए।
हम लोग अनेक गोष्ठियों में जौनसारी युवक- युक्तियां में साहित्य सृजन को प्रेरित करने की बात करते हैं। यदि हम सचमुच यह चाहते हैं तो कुछ होनहार विद्वानों साहित्यकारों को अणु पंडित शिवराज जी की रचनाए संकलित करनी होगी, और किसी को उत्पालटा जाकर या विकास नगर में राय साहब के परिजनों पौत्र देवेन्द्र सिंह राय (पत्रकार) से उनकी रचनाओं का संकलन कर लेना चाहिए तब प्रकाशन का कार्य इतना कठिन नहीं होगा।
सरदार सिंह राय “सर” जौनसारी, का जन्म उदपालटा मै हुआं था इनके पिता माधौ सिंह राय सदर सियाणा (चोतरू) थे सर जौनसारी का जन्म 2 अक्टूबर,1929 मै हुआ व इनकी मृत्यु 7 जनवरी 2003 में देहरादून के एक निजी अस्पताल में हुई। सरदार सिंह राय उच्च कोटि के शिक्षक थे। आसाराम वेदिक इंटर कॉलेज में अंग्रेजी के प्रवक्ता व प्रधानाचार्य के पद पर थे। इनको चार भाषाओं में महारत हासिल थी यह अपने
आप में शब्दकोश के भंडार थे यह एक साहित्यकार, कवि शायर व लेखक थे इनको हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू फारसी, में इमारत हासिल थी। इनको राजनीति का भी एक अच्छा अनुभव था इन्होंने चकराता विधानसभा से विधायक का चुनाव भी लड़ा था। सर जौनसारी ने अंग्रेजी में कई पुस्तक लिखी है कई पत्रिकाएं एवं समाचार पत्रों के संपादक भी रहे समय-समय पर पत्रिकाओं एवं समाचारों पत्रों में उनके लिखे लेख छापा
करते थे आकाशवाणी नजीबाबाद से इनको सर जौनसारी की उपाधि मिली थी यह समय-समय पर जौनसार बावर के विकास , शिक्षा,लोक संस्कृति व बोली भाषा, वेशभूषा आदि के लिए आकाशवाणी से इनका प्रसारण किया जाता था। सरदार सिंह राय ने शिक्षा के क्षेत्र में जौनसार बाबर पछवादून रवांई हिमाचल क्षेत्र में
शिक्षा के क्षेत्र में बहुत बढ़ा योगदान रहा। सरदार सिंह राय बहुत ही सरल स्वभाव के व्यक्ति थे। इन का योगदान साहिया मै हाई स्कूल खुलवाने में बहुत बड़ा योगदान रहा। इनको हर क्षेत्र में महारत हासिल थी सरदार सिंह राय ज्ञानी एवं योग्य व्यक्ति थे। इनको कई मंचों पर सम्मानित किया गया। सरदार सिंह राय जौनसार बावर के प्रथम व्यक्ति हैं जिन्होंने M.A इंग्लिश में किया था । ये कई यूनिवर्सिटिययों के सदस्य भी रहे।
राय साहब जौनसार बावर ही नहीं जिला देहरादून में लोक प्रिय व्यक्ति थे
सर जौनसारी जी चार भाषाओं के ज्ञाता थे
सरदार सिंह राय कि प्रारम्भिक शिक्षा कालसी मै हुईं। उसके बाद गढ़वाल यूनिवर्सिटी देहरादून में हुई
आकाशवाणी नजीबाबाद से इनको सर जौनसारी कि उपाधि से नवाजा गया
हिंदी भवन देहरादून मैं आयोजित एक भव्य नागरिक समारोह में
सरदार सिंह राय “सर “जौनसारी को उर्दू शायरी के लिए” गौरव भारती” की उपाधि प्रदान कर सम्मानित किया गया
DAV college जौनसार बावर छात्र संघ के अध्यक्ष भी रहे..।
आशा राम बैदिक इन्टर कालेज में प्रवक्ता व प्रधानाचार्य रहे
जौनसार बावर के प्रथम व्यक्ति जिन्होंने इंग्लिश मैं एम,ए किया था
राजकीय इंटर कालेज साहिया मै प्रबन्धक भी रहे।
साहित्यकार,लेखक, कवि,शायर थे
सरदार सिंह राय एक अच्छे वेद भी थे
अंग्रेजी भाषा मैं अनेकों पुस्तकें लिखी
राजकीय इंटर कालेज साहिया मै प्रबन्धक भी रहे।
जुन 1993 में आसाराम वेदिक इंटर कॉलेज से सेवानिवृत्त हुए






