धारकुंडी ब्यूरो बांकेलाल निषाद “प्रणव”
अचिंत्य समाधिस्थ निद्रासन:– दो गुरु भाई महापुरुषों का अद्भुत मिलन का साक्षी धारकुंडी आश्रम

अचिंत्य निद्रासन में समाधिस्थ ब्रम्हलीन हो चुके श्री- श्री १००८ श्री स्वामी श्री सच्चिदानंद जी महाराज के समाधिस्थ पार्थिव शरीर को जब उन्हीं के गुरु भाई यथार्थ गीता के प्रणेता स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज ने अंतिम प्रणाम कर विदा किये तो धारकुंडी आश्रम का वन प्रांत, हर एक शिला, हर एक वन्य प्राणी, हर एक आबो-हवा, उपस्थित हजारों संत जन, भक्त गण अपने अश्रुपूरित नेत्रों से निकलने वाली अश्रु धारा को रोक नहीं पाया । पूज्य श्री स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज की निगाहें अपने गुरुभाई पूज्य श्री धारकुंडी महाराज जी को जी भरकर निहार रही थी उसी बहाने बार बार नतमस्तक हो रहे थे । शास्वत शांति की चिरनिंद्रा में समाधिस्थ पूज्य श्री धारकुंडी महाराज जी का देदीप्यमान चेहरा उनका रोम-रोम अपने गुरु भाई पूज्य श्री स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज की भावावेष की अगाध प्रेम की गंग धारा में गोते लगा रहे थे । 49 सेकेंड के इस वीडियो में दो महापुरुषों का अंतिम भरत मिलाप बहुत कुछ कह रहा है। एक ही गुरु घराने के आध्यात्मिक अखाड़े से निकले दोनों महापुरुषों में आज एक कैसे अपने साकार स्वरूप से मुक्त होकर सूक्ष्म शरीर से विश्व के कण-कण में एकाकार हो कर अचिंत्य निद्रा में सो गये। दोनों मर्यादा पुरुषोत्तम गुरु भाई महापुरुषों में अद्भुत प्रेम, अद्भुत मर्यादा और रहनी थी । विधना की आज ऐसी घड़ी है कि दोनों लीला धारियों में एक, दूसरे लीलाधारी को लीला करने के लिए छोड़ कर चला गया। काल बलि से मुक्त दोनों महापुरुष कालजयी है दोनों भव प्रत्यय योगी हैं “वह मृत्यु सराहनीय है जिसके पीछे जन्म न हो और वह जन्म सराहनीय है जिसके पीछे मृत्यु न हो” इस सूक्ति के साक्षात जीवंत उदाहरण हैं दोनों योगेश्वर महापुरुष। धारकुंडी आश्रम का रजकण पेड़ पौधे, शिला, आलौकिक वायुमंडल , आश्रम के चहुंओर फैली दिव्य आभा मंडल, और खुद महान तपस्वियों की तपोस्थली धारकुंडी आश्रम आज दोनों महापुरुषों के इस कभी न विस्मृत होने वाले क्षण को सदा यादगार बनाए रखेंगे। आइये हम भी साक्षी बनें इस अद्भुत आलौकिक महान युग महापुरुष युगांतरकारी युग प्रवर्तक महापुरुषों के भरत मिलाप की जोड़ी का कैमरामैन राजेश तिवारी के साथ वरिष्ठ पत्रकार एवं चिंतक बांकेलाल निषाद प्रणव की रिपोर्ट।






