एनएच-123 के चौड़ीकरण पर उठे सवाल, पूर्व अल्पसंख्यक आयोग सदस्य संजय जैन ने केंद्रीय मंत्री को भेजा ज्ञापन
देहरादून जनपद में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-123 (धर्मावाला से बाड़वाला) के प्रस्तावित चौड़ीकरण/एलीवेटेड रोड निर्माण को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध और चिंताएं सामने आने लगी हैं। इसी क्रम में विकासनगर निवासी एवं उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व सदस्य संजय जैन ने केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री, भारत सरकार को ज्ञापन भेजकर प्रस्तावित योजना पर पुनर्विचार की मांग की है।
ज्ञापन में संजय जैन ने कहा कि एनएच-123 हरबर्टपुर और विकासनगर नगर पालिका क्षेत्रों के बीचो-बीच से होकर गुजरता है, जिससे यह सड़क दोनों नगरों को दो हिस्सों में विभाजित करती है। यह मार्ग जौनसार-बावर, रवाईं-जौनपुर तथा हिमाचल प्रदेश के हट्टी जनजातीय क्षेत्र के लिए जीवनरेखा (लाइफलाइन) के रूप में कार्य करता है।
उन्होंने ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया कि इस राजमार्ग के किनारे अनेक ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के भवन स्थित हैं, जिनमें आर्य समाज, तिलक भवन, सनातन धर्म मंदिर, जामा मस्जिद, जैन मंदिर, गीता भवन, सेंट पॉल चर्च, एसएफएफ बौद्ध मंदिर, तहसील परिसर, एआरवी इंटर कॉलेज तथा कई पेयजल योजनाएं शामिल हैं। ऐसे में सड़क चौड़ीकरण से इन धरोहरों को भारी क्षति पहुंचने की आशंका है।
संजय जैन ने बताया कि विकासनगर उत्तराखंड का एक महत्वपूर्ण और नियोजित (प्लान्ड) शहर है, जहां दशकों से सैकड़ों परिवार अपने प्रतिष्ठानों के साथ ही पीछे के हिस्सों में आवास के रूप में भी भवनों का उपयोग करते आ रहे हैं। यदि पहले से पर्याप्त चौड़े और व्यवस्थित इस राजमार्ग को और चौड़ा किया गया, तो इससे न केवल ऐतिहासिक विरासत प्रभावित होगी, बल्कि स्थानीय व्यापार और रोजगार पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
उन्होंने मांग की कि एनएच-123 के वर्तमान स्वरूप का संरक्षण करते हुए भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप संतुलित योजना बनाई जाए। साथ ही किसी भी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) या अंतिम योजना को तैयार करने से पहले सभी हितधारकों—स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों और सामाजिक संगठनों—के साथ बैठक कर उनके सुझाव और चिंताओं को गंभीरता से सुना जाए।






