अयोध्या ब्यूरो बांकेलाल निषाद “प्रणव”
रुदौली तहसील: हाइकोर्ट के आदेश का नहीं हो रहा कंप्लायंस।
कंप्लायंस केवल कागजी रिपोर्ट तक सीमित, जमीनी हकीकत एचसीआई का उल्लंघन
अयोध्या में रुदौली तहसील में माननीय हाईकोर्ट के आदेश के उल्लंघन का बड़ा खेल चल रहा है। वहां के तहसील प्रशासन के कान पर जुं तक नहीं रेंग रहा है। माननीय न्यायपालिका के सामने अच्छे-अच्छों का पसीना छूटता है उनका आदेश सलाखों पर रहता है। माननीय न्यायपालिका के अधीनस्थ जितने भी हैं अधिकारी/ कर्मचारी हैं सबके सब को आदेश मानना ही मानना है। लेकिन रुदौली तहसील इन सबों से इतर है। पूरा प्रकरण यह है कि पीड़ित त्रिलोकी प्रसाद पुत्र जग्गू निवासी ग्राम भिटौरा ने बताया कि गाटा संख्या 172/ 0.033 मेरे नाम संक्रमणीय भूमिधर अंकित है। जिसका सीमांकन उपजिलाधिकारी रूदौली द्वारा की गई। माननीय उच्च न्यायालय के आदेश व उपजिलाधिकारी रूदौली न्यायालय के आदेश के अनुपालन में दिनांक २८/४/२०२५ को वादी, ग्रामवासियों एवं ग्राम प्रधान के समक्ष राजस्व व पुलिस बल के साथ संयुक्त रूप से स्थल पर भूमि गाटा संख्या १७२/०.०३३ हेक्टेयर की पत्थर नसब की कार्रवाई करा कर स्थल पर खूंटा लगवा कर विवादित भूमि पर तार लगवा कर घेरकर कब्जा उसे दिलाया गया था। पीड़ित ने बताया कि यदि मैं उक्त कब्जे की जमीन पर निर्माण कार्य कराने जाता हूं तो एसडीएम व तहसीलदार रूदौली उस निर्माण कार्य को रूकवा देते हैं। ऐसे में मुझे न्याय नहीं मिल रहा है। माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद पीड़ित को न्याय नहीं मिल पा रहा है। ऐसा है रूदौली प्रशासन। पीड़ित ने बताया कि यदि मुझे न्याय नहीं मिला तो मैं माननीय मुख्यमंत्री का दरवाजा खटखटाऊंगा।






