वरिष्ठ पत्रकार एवं चिंतक बांकेलाल निषाद “प्रणव”
स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज के शिष्यगण धारकुंडी सरकार से लिए आशीर्वाद
श्री परमहंस आश्रम पालघर मुंबई से श्री परमहंस आश्रम बदलापुर पहुंच कर लिए आशीर्वाद
गुरु अमृत है जगत में, बाकी सब विषबेल,।
सतगुरु संत अनंत है, प्रभु से कर दे मेल।।
गीली मिट्टी अनगढ़ी, हमको गुरुवर जान,।
ज्ञान प्रकाशित कीजिए, आप समर्थ बलवान।।

इस धरा धाम पर समय के दो महापुरुष, जिनके गुरु एक, विद्या एक आध्यात्मिक अखाड़ा एक, आज इस धरा धाम पर फैली अज्ञान रुपी अंधकार को अपने आध्यात्मिक ज्ञान से प्रकाशित कर रहे हैं। संसार की आध्यात्मिक ज्ञान की पिपासा को शांत कर रहे हैं ऐसे दो महापुरुष हैं, तत्व द्रष्टा महापुरुष धारकुंडी महाराज जी जिन्हें संसार ब्रम्हचारी महाराज जी अथवा सच्चिदानंद महाराज जी के नाम से भी जानता हैं और उन्हीं के गुरुभाई दूसरे महापुरुष हैं विश्व गुरु विश्व गौरव से सम्मानित यथार्थ गीता के प्रणेता तत्व द्रष्टा महापुरुष परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज । इस अवसर पर दोनों महापुरुष मुंबई महाराष्ट्र में ही अपने आध्यात्मिक प्रवास पर हैं। इस शुभ अवसर पर पूज्य श्री स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज के शिष्यगण जिसमें पूज्य श्री गुरुचरणानंद जी महाराज, पूज्य श्री चिन्तनमयानंद जी महाराज, पूज्य श्री अकेलानंद जी महाराज, पूज्य श्री तानसेन महाराज, पूज्य श्री लाले महाराज जी पूज्य श्री बिल्लू महाराज जी पूज्य श्री रामसनेही महाराज जी पूज्य श्री आशीष महाराज जी पूज्य श्री पप्पू महाराज जी पूज्य श्री चौधरी महाराज जी पूज्य श्री निर्मल महाराज जी पूज्य श्री अखिलेश महाराज जी आदि संतो ने दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। पूज्य गुरुदेव भगवान धारकुंडी सरकार ने उक्त शिष्य गणों को भजन के उतार- चढ़ाव संबंधित अध्यात्म के गूढ़तम तत्वों को बताये, ब्रम्ह विद्या आदि पर चर्चा किये और पूज्य गुरुदेव भगवान तत्व द्रष्टा महापुरुष परमहंस स्वामी अड़गड़ानंद जी का कुशलक्षेम पूछे। पूज्य श्री गुरुदेव भगवान धारकुंडी सरकार ने उनको प्रसाद ग्रहण कराकर आशीर्वाद देकर उन्हें सकुशल विदा किये। इस अवसर पर आशीष महाराज जी ने शुभ नाम बताकर सभी शिष्य गणों का पूज्य श्री धारकुंडी महाराज जी से परिचय कराया । पूज्य श्री धारकुंडी महाराज जी ने अपने समक्ष सभी शिष्य गणों को बैठाकर उन्हें यथोचित उपदेशित किया।
गूढ़उ तत्व न साधु दुरावहि।
आरत अधिकारी जहं पावहि।।
ज्ञातव्य हो कि उक्त दिव्य दोनों महापुरुषों के गुरूदेव भगवान, पूज्य श्री स्वामी परमानंद जी महाराज जिनके महाप्रयाण के बाद उनके तीन शिष्य गणों के कंधों पर आध्यात्मिक ज्ञान के प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी बढ़ गई। जिसमें तीसरे शिष्य भगवानानंद जी महाराज थे जो विगत वर्षों में महाप्रयाण को प्राप्त हो चुके हैं। और आज पूज्य श्री दादा गुरु स्वामी परमानंद जी महाराज के उक्त दो महापुरुष के कंधों पर उनके आध्यात्मिक ज्ञान के प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी है। उक्त दोनों महापुरुषों ने अनादिकाल से ऋषि-मुनियों द्वारा शोधित भवसागर को पार करा देने वाली परावाणी के प्रचार-प्रसार का केंद्र देश- विदेश में अनगिनत श्री परमहंस आश्रम बने हुए हैं । विश्व गुरु भारत के तमगे की मर्यादा को उक्त दोनों महापुरुष शिरोधार्य कर अनवरत भारत के गौरवशाली सांस्कृतिक आध्यात्मिक विरासत के इतिहास को संवर्धित कर रहे हैं।






