संपादकीय द्वारा वरिष्ठ पत्रकार एवं चिंतक बांकेलाल निषाद “प्रणव”
महापुरुष कालजयी/ काल बलि से मुक्त, अजर-अमर अविनाशी होता है — स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज
*यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत*।
*अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम।।*

आज सत्संग हाल में सायंकालीन पूज्य श्री स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज के सत्संग / आशीर्वाद के संपन्न होने के बाद बगल के भजन कक्ष में कुछ पल के लिए पूज्य श्री स्वामी जी का आशीर्वाद, शरण सानिध्य, मुझे भी प्राप्त हुआ। पूज्य श्री स्वामी जी से मेरा परिचय उनकी सेवा में रत सत्यान्वेशी शिष्यों ने कराया और निवेदन की मुद्रा में उन्होंने परिचय दिया कि पत्रकार बांकेलाल निषाद “प्रणव” आपका शरण सानिध्य, दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए आये हुए हैं। पूज्य श्री स्वामी जी का देदीप्यमान आभा से युक्त गौर वर्ण चेहरा महाराणा प्रताप जैसी विशाल पर्सनेलिटी उनके इर्द गिर्द उनकी सेवा में रत दर्जनों की संख्या में सत्यान्वेशी शिष्य ऐसा दिव्य आलौकिक ओर दिव्य दरबार जिन्हें देखने के बाद निगाहें ही नहीं हटती हैं। पूज्य गुरुदेव भगवान मुझ पर दृष्टिपात करते हुए कहा कि मेरा भी कुछ अखबार में निकाल दे । मैंने आर्त भाव में आदेश लिया सरकार क्या निकाल दुं? फिर उन्होंने कहा कुछै निकाल दे। मैं पुनः विनम्रतापूर्वक निवेदन किया कि सरकार आदेश करें कि क्या निकालूं? उन्होंने रहस्यमय मुस्कान को विखेरते हुए जबाब दिया कि यही निकाल दे कि मैं कब मरूंगा? मैं उनका जबाब सुना तुरंत दंडवत हो गया और मेरी अंतरात्मा से आवाज आई कि पूज्य श्री स्वामी जी अजर अमर है ,अविनाशी हैं शास्वत कालजयी अलमस्त सर्वज्ञ सनातन हैं और महान योगेश्वर हैं। पूज्य श्री स्वामी जी के गुरुदेव भगवान स्वामी परमानंद जी महाराज कहा करे हो मरता तो संसार है महापुरुष तो उसी दिन मर जाते हैं जिस दिन वे अपना स्वरूप प्राप्त कर लेते हैं उसी दिन शरीरों का संबंध छूट जाता है फिर शरीर धारण नहीं करना पड़ता, शरीर धारण करना शरीर त्यागने के सिलसिले से मुक्ति मिल जाती है जन्म और मृत्यु के बीच की यात्रा समाप्त हो जाती है। वे सूक्ष्म शरीर से सदैव विद्यमान रहते हैं । चौथी शताब्दी ईसा पूर्व के संत शिरोमणि अत्रि भगवान पूज्य गुरुदेव भगवान के गुरु स्वामी परमानंद जी महाराज से 20 सदी में मिले लगभग पांच हजार वर्ष का लंबा अंतराल। दादा गुरु कहे हो मैं सहज सूक्ष्म शरीर से सदैव विद्यमान रहूंगा, कल्याण करता रहूंगा, जो भी श्रद्धा से याद करेगा मैं उसकी भली प्रकार देख रेख करता रहूंगा। दादा गुरु की बात अक्षरशः सत्य थी उनका शरीर छूटने के बाद भी साक्षात उन्होंने पूज्य श्री स्वामी जी को दर्शन दिए, आसन पर बैठे – बैठे कहे, *तू काहे चिंता करत है , मैं आसन पर बैठा हूं, मै देखत हूं, तू बैठ चरणन में*। इसी तरह द्वापर युग के भगवान श्री कृष्ण त्रेता युग के भगवान राम अजर अमर है। त्रेता के भगवान राम तुलसी दास को 16 वीं सदी में दर्शन दिये। और भगवान श्री कृष्ण सूर दास को 15 वीं सदी और मीराबाई को 16 वीं सदी में दर्शन दिये। कबीर दास जी कहते हैं कि 
*हम न मरब मरिहैं संसारा। हमको मिला जिआवनहारा।।*
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महापुरुष कालजयी होते हैं। काल बाधित नहीं होते हैं काल उनके अधीन होता है। भगवान राम के पास काल खुद प्रकट हुआ और उनसे निवेदन किया कि प्रभु धरा धाम पर जितना आपको लीला करना था आपने कर लिया यदि आप को और भी कुछ लीला करना हो तो आप करें मै आपसे आदेश लेने आया हूं कि यदि आपकी इच्छा हो तो रहें या आपका आदेश हो तो चलें। इसी तरह भगवान श्री कृष्ण के पास काल आया और उनसे भी भगवान राम की ही तरह निवेदन किया। भगवान श्री कृष्ण ने कहा अभी रुको यदुवंशियों के मामलों का मुझे कुछ हल करना अभी बाकी है। काल उनको प्रणाम कर वापस चला गया। बुद्ध महावीर कबीर रैदास सबके सब महापुरुष कालजयी थे जैसे संत शिरोमणि परदादा गुरु पूज्य सत्संगी महाराज जी, महापुरुष दादा गुरु पूज्य परमानंद जी महाराज व आज खुद स्वयं पूज्य गुरुदेव भगवान प्रमाण के रूप में ससम्मान प्रतिष्ठित हैं। पूज्य गुरुदेव भगवान ने मुझे आदेश दिया कि कुछ मेरे बारे में निकाल दे। लेकिन मैं पूज्य गुरुदेव भगवान के कृतत्व व व्यक्तित्व उनके चमत्कार, उनकी महिमा के विषय में कुछ निकालने की मेरी औकात ही नहीं है उनके विषय में कुछ निकालने का मतलब आकाश में मक्खी के थाह लगाने जैसा है। पूज्य गुरुदेव भगवान अनंत हैं और उनकी महिमा भी अनंत हैं उस अनंत की थाह लगाने में कलमकार की कलम एक कदम भी नहीं चल पायेगी । *हरि अनंत हरि कथा अनंता।*
*कहहि सुनहि बहु विधि सब संता*।।*
जिनके इशारे से एक पत्ता भी न हिले उन गुरुदेव भगवान के कमलवत चरणों में मैं कोटि-कोटि नमन करता हूं उनसे मेरी यही करवद्ध निवेदन है कि संसार में फैली धर्म विषयक भ्रांतियों का शमन करें और गीतोक्त साधना का पूरे संसार में साम्राज्य स्थापित करें। जिससे जन जन में वसुधैव कुटुंबकम्, जियो और जीने दो की विचारधारा धरातल पर आकार ले सके।






