विश्व गुरु विश्व गौरव से सम्मानित कालजयी धर्म-शास्त्र यथार्थ गीता के प्रणेता समय के तत्व द्रष्टा महापुरुष अनंत विभूषित परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज की तरफ से——-
“15 अगस्त को 80 वां आजादी मना रहे देश-विदेश में बसे समस्त भारतवासियों को शुभ आशीर्वाद”
वास्तविक आज़ादी— “षडविकारों के बंधन से मुक्ति व जन्म-जन्मांतर के अनन्त संस्कारों से मुक्ति और मायातीत होना ही वास्तविक आज़ादी है”
*परतंत्रता* — जन्म-जन्मांतर के अनन्त संस्कारों के मकड़जाल के प्रपंच और अपने अच्छे बुरे कर्मों के वशीभूत जीव बंधन में बंध कर परतंत्र है।

*स्वयं की आजादी के उपाय*– जन्म जन्मांतर के अनंत संस्कार दग्ध तभी होंगे जब गीतोक्त साधना का अक्षरशः पालन होगा। गीतोक्त साधना का मूलमंत्र समय के महापुरुष सद्गुरु का ध्यान, ओम्/राम/ अथवा शिव का जप है। जिसकी विस्तृत व्याख्या ईश्वरीय वाणी श्रीमद्भागवत गीता भाष्य यथार्थ गीता में संकलित है।
*एक ईश्वर की उपासना* — यथार्थ गीता एक ईश्वर की आराधना पर बल देती है, आराधना ही कर्म है, आराधना के आलावा संसार में जो भी किया जाता है वह कर्म की श्रेणी में नहीं आता।
वर्ण-व्यवस्था — संसार का हर जीव/ मानव ईश्वर की संतान हैं अर्थात जन्म से सभी बराबर हैं। वर्ण-व्यवस्था (ब्राम्हण क्षत्रिय वैश्य और शूद्र) एक यौगिक शब्दावली है, सद्गुरु के शरणागत भजन- चिंतन के आधार पर इसका वर्गीकरण हुआ है। कोई जन्म से श्रेष्ठ नहीं है।
ईश्वरीय प्रेरणा से लिखी गई यथार्थ गीता-— यथार्थ गीता लिखने के लिए स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज को कई बार आकाशवाणी हुई, इसके लिए ईश्वर ने उनको संसार का सर्वोत्तम सुयोग्य महापुरुष का सर्टिफिकेट दिया। उनके 23 वर्ष के कठोर तपस्या का फल यथार्थ गीता के रूप में संसार अमृत पान कर रहा है।

दो- जाति — संसार में जाति दो है जिसके हृदय में दैवीय संपद कार्य करती है वह देवता और जिसके हृदय में आसुरी संपद कार्य करती है वह असुर है।
आत्मा ही सनातन है, सत्य है— आत्मा ही सनातन है और जो हृदयस्थ आत्मा का भजन करता है वही सनातनी है। आत्मा परमात्मा का पर्याय है , शास्वत है, अजन्मा, निर्विकार आदि विभूतियों से विभूषित है
ज्ञान क्या है? — ईश्वर की प्रत्यक्ष जानकारी का नाम ही ज्ञान है। जो सद्गुरु कृपा से ही संभव है।
देव पूजा — अनादिकालीन महापुरुषों की शोध में एक ईश्वर की आराधना का विधि-विधान है। बाकी कामनाओं से जिनकी बुद्धि आक्रांत है ऐसे मूढ़ बुद्धि ही परमात्मा के अतरिक्त अन्य देवताओं की पूजा करते हैं।
श्री परमहंस आश्रम शक्तिषगढ़— भारत के उत्तर प्रदेश मिर्जापुर जिले में स्थित मोक्षदायिनी ज्ञान गंगा केंद्र का नाम, जहां से परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी के श्रीमुख से निसृत ईश्वरीय वाणी यथार्थ गीता का पूरे विश्व के लिए लाइव प्रसारण हुआ है और युगों-युगों तक लाइव प्रसारण होता रहेगा।






