स्टेट ब्यूरो बांकेलाल “प्रणव”
ॐ श्री परमहंस आश्रम परमधाम गोपालखेड़ा लखनऊ में यथार्थ गीता पाठ व भंडारे का आयोजन
भक्तों द्वारा मुफ्त में बांटी गई यथार्थ गीता व अंगवस्त्र

विगत कई वर्षों से हर माह के 12 तारीख को यथार्थ गीता पाठ व 13 तारीख को विशाल भंडारा, व मुफ्त में यथार्थ गीता व गमछे का वितरण ॐ श्री परमहंस आश्रम परमधाम गोपालखेड़ा लखनऊ में अनवरत चलता है। जिसकी पुनरावृत्ति अगस्त माह में भी हुई। चूंकि अगस्त माह में ही भारत के विभिन्न विचारधाराओं के क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानियों की आहुति से भारत को आजादी मिली। 15 अगस्त को 80 वां आजादी मना रहे देश-विदेश में बसे समस्त भारतवासियों पर पूज्य श्री गुरुदेव भगवान परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज की कृपा बनी रहे।वास्तव में “षडविकारों के बंधन से मुक्ति व जन्म-जन्मांतर के अनन्त संस्कारों से मुक्ति और मायातीत होना ही वास्तविक आज़ादी है । जन्म-जन्मांतर के अनन्त संस्कारों के मकड़जाल के प्रपंच और अपने अच्छे बुरे कर्मों के वशीभूत जीव बंधन में बंध जाना ही परतंत्रता है। जन्म जन्मांतर के अनंत संस्कार दग्ध तभी होंगे जब गीतोक्त साधना का अक्षरशः पालन होगा। गीतोक्त साधना का मूलमंत्र समय के महापुरुष सद्गुरु का ध्यान, ओम्/राम/ अथवा शिव का जप । जिसकी विस्तृत व्याख्या ईश्वरीय वाणी श्रीमद्भागवत गीता भाष्य यथार्थ गीता में संकलित है । हमें एक ईश्वर की आराधना करनी चाहिए। यथार्थ गीता एक ईश्वर की आराधना पर बल देती है, आराधना ही कर्म है, आराधना के आलावा संसार में जो भी किया जाता है वह कर्म की श्रेणी में नहीं आता। संसार का हर जीव/ मानव ईश्वर की संतान हैं अर्थात जन्म से सभी बराबर हैं। वर्ण-व्यवस्था (ब्राम्हण क्षत्रिय वैश्य और शूद्र) एक यौगिक शब्दावली है, सद्गुरु के शरणागत भजन- चिंतन के आधार पर इसका वर्गीकरण हुआ है। कोई जन्म से श्रेष्ठ नहीं है।
यथार्थ गीता पूज्य श्री गुरुदेव भगवान द्वारा ईश्वरीय प्रेरणा से लिखी गई है । यथार्थ गीता लिखने के लिए स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी महाराज को कई बार आकाशवाणी हुई, इसके लिए ईश्वर ने उनको संसार का सर्वोत्तम सुयोग्य महापुरुष का सर्टिफिकेट दिया। उनके 23 वर्ष के कठोर तपस्या का फल यथार्थ गीता के रूप में संसार अमृत पान कर रहा है। पूज्य श्री बताते हैं कि संसार में जाति दो है जिसके हृदय में दैवीय संपद कार्य करती है वह देवता और जिसके हृदय में आसुरी संपद कार्य करती है वह असुर है। आत्मा ही सनातन है, सत्य है। आत्मा ही सनातन है और जो हृदयस्थ आत्मा का भजन करता है वही सनातनी है। आत्मा परमात्मा का पर्याय है , शास्वत है, अजन्मा,
निर्विकार आदि विभूतियों से विभूषित है । ईश्वर की प्रत्यक्ष जानकारी का नाम ही ज्ञान है। जो सद्गुरु कृपा से ही संभव है। अनादिकालीन महापुरुषों द्वारा देव पूजा*का विधान नहीं है। अनादिकालीन महापुरुषों की शोध में एक ईश्वर की आराधना का विधि-विधान है। बाकी कामनाओं से जिनकी बुद्धि आक्रांत है ऐसे मूढ़ बुद्धि ही परमात्मा के अतरिक्त अन्य देवताओं की पूजा करते हैं। भारत के उत्तर प्रदेश मिर्जापुर जिले में स्थित मोक्षदायिनी ज्ञान गंगा केंद्र का नाम, जहां से परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानंद जी के श्रीमुख से निसृत ईश्वरीय वाणी यथार्थ गीता का पूरे विश्व के लिए लाइव प्रसारण हुआ है और युगों-युगों तक लाइव प्रसारण होता रहेगा।






